इंसानियत शर्मसार: एम्बुलेंस के नहीं थे पैसे, टैक्सी की छत पर शव लेकर पहुंची बहन!

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Where has humanity lost? Didn't have money to call an ambulance, so sister tied brother's dead body to the roof of a taxi and took it away

सरकार और प्रशासन कितने ही व्यनवस्था में सुधार के दावे कर ले लेकिन ज़मीनी हकीकत किसी ना किसी रूप में सामने आ ही जाती है। ताज़ा मामला उत्तराखंड का है, जहां एक गरीब युवती को एंबुलेंस के लिए पैसे नहीं होने के कारण अपने भाई के शव को टैक्सी की छत पर बांधकर घर तक ले जाना पड़ा। हालांकि, घटना का संज्ञान लेते हुए सीएम धामी ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं, साथ ही अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बेरीनाग के एक गांव की रहने वाली शिवानी अपने छोटे भाई अभिषेक के साथ हल्द्वानी के हल्दूचौड़ में एक कंपनी में काम करती थी। पुलिस ने बताया कि अभिषेक शुक्रवार को सिर में दर्द होने की बात कहते हुए काम से जल्दी घर आ गया और बाद में वह रेलवे पटरी के पास बेसुध मिला। बाद में उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

एंबुलेंस के लिए चालकों ने मांगे हजारों रुपये

पोस्टमार्टम करवाने के बाद पुलिस ने शनिवार को अभिषेक का शव शिवानी को सौंप दिया। शिवानी ने बताया कि शव को गांव ले जाने के लिए अस्पताल के शवगृह के बाहर खड़े कई एंबुलेंस चालकों से बात की। लेकिन उन्होंने उसके लिए दस बारह हजार रुपये किराया मांगा। इतने पैसे उसके पास नहीं थे इसलिए उसने सबसे कम किराया लेने की मिन्नतें कीं लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा और आखिरकार उसने टैक्सी के सहारे शव ले जाने का फैसला किया।

कई किलोमीटर तक छत पर बांधा रहा शव

उन्होंने बताया कि आखिर में उसने अपने गांव के एक टैक्सी चालक को बुलाया और भाई के शव को सामान की तरह टैक्सी की छत पर बांधकर 195 किलोमीटर दूर घर तक ले गई। इस बारे में पूछे जाने पर सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अरुण जोशी ने कहा कि मामला अस्पताल के बाहर ही रहा जिससे उनके संज्ञान में नहीं आया।

अस्पताल ने ज़िम्मेदारियों से झाड़ा पल्ला

पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि, अगर अस्पताल के अंदर की बात होती तो उनके संज्ञान में आई होती या उनसे सहयोग के लिए कहा जाता तो वह निश्चित रूप से मदद करते। अस्पताल के बाहर खड़े मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि निजी एंबुलेंस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। वे रोगियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए उनसे मनमाफिक किराया वसूलते हैं।

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