Report: Somnath mishra
जबलपुर: मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में 226 करोड़ रुपये के टेंडर फर्जीवाड़े का मामला गंभीर मोड़ ले चुका है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब बिजली कंपनी ने भी अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है।सूत्रों के अनुसार कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फर्जी दस्तावेज और मनगढ़ंत परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट के आधार पर यह बड़ा ठेका हासिल किया गया था। विभाग अब कंपनी से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाल रहा है।
ईओडब्ल्यू ने कंपनी के संचालक सहित तीन लोगों को आरोपी बनाकर जांच आरंभ कर दी है। बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में बिजली कंपनी के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है, जिसके चलते मुख्यालय शक्ति भवन में हड़कंप मचा हुआ है। आंतरिक जांच और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई दोनों समानांतर रूप से जारी हैं, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और नाम इस घोटाले में सामने आ सकते हैं।





