आरपीएससी सदस्य संगीता आर्य के स्थिति के बाद कांग्रेस में चर्चा हुई तेज

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image

28 नवंबर को राजस्थान लोक सेवा आयोग की सदस्य संगीता आर्य ने अपना इस्तीफा राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को सौंप दिया है। आर्य का कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक था, लेकिन विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बडिय़ों और भ्रष्टाचार की जांच एसीबी द्वारा की जा रही थी । ऐसे में बढ़ते दबाव के कारण आर्य को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा । जांच एजेंसी कई और भर्ती परीक्षाओं के मामले में भी अब संगीता आर्य से पूछताछ करेगी । सूत्रों की माने तो ऐसी भी जल्द ही संगीता आर्य के मामले में बड़ा खुलासा कर सकती है । जांच एजेंसी लगातार भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर जांच करने में लगी है जांच में एक के बाद एक खुलासे देखने को मिल रहे हैं । जानकारों की माने तो लगातार पूछताछ ह से घबराकर संगीता आर्य ने अपने पद से इस्तीफा दिया है । एसीबी ने गत 10 नवंबर को संगीता आर्य को जयपुर मुख्यालय पर तलब किया था, लेकिन तब आयोग में व्यस्त रहने के कारण संगीता आर्य उपस्थित नहीं हुई। सूत्रों की माने तो एसीबी ने फिर से तलब किया, लेकिन इससे पहले ही संगीता आर्य ने आयोग के सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। यह बात अलग है कि आर्य ने हर संभव कोशिश की वे अपना कार्यकाल पूरा करे, लेकिन एसीबी का दबाव इतना बढ़ा की उन्हें सदस्य का पद छोड़ना ही पड़ा।

संगीता आर्य अशोक गहलोत की करीबी मानी जाती है अब कह सकते हैं कि अशोक गहलोत गुट के एक और नेता का विकेट गिरा ।संगीता आर्य की आयोग में सदस्य के तौर पर अक्टूबर 2020 में तब नियुक्ति हुई थी, जब उनके पति निरंजन आर्य राजस्थान के मुख्य सचिव थे। उस समय अशोक गहलोत कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री थे। संगीता आर्य की एकमात्र योग्यता यह थी कि वह मुख्य सचिव की पत्नी है। सब जानते हैं कि अशोक गहलोत की सरकार को बचाने में निरंजन आर्य ने कैसी कैसी भूमिका निभाई। मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए निरंजन आर्य की नीयत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्य ने गत विधानसभा का चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोजत से लड़ा। हालांकि आर्य चुनाव हार गए। कहा जा सकता है कि संगीता आर्य के इस्तीफे के साथ ही पूर्व सीएम गहलोत का एक और विकेट गिर गया । इससे पहले मंजू शर्मा की नियुक्ति भी गहलोत ने ही की थी। इसी प्रकार गिरफ्तार होकर जेल में पड़े सदस्य बाबूलाल कटारा की नियुक्ति भी गहलोत ने ही की थी। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने अध्यक्ष रहे संजय श्रोत्रिय पर भी टिप्पणी की। उन्हें भी गहलोत के शासन में ही नियुक्ति मिली। आयोग में अभी भी गहलोत शासन में नियुक्त सदस्य कैलाश मीणा, कर्नल केसरी सिंह राठौड़ और प्रोफेसर अयूब कार्यरत है। केसरी सिंह राठौड़ की नियुक्ति के तुरंत बाद ही अशोक गहलोत ने खेद प्रकट कर दिया था। गहलोत ने स्वीकार कि उन्होंने केसरी सिंह राठौड़ की पृष्ठभूमि जाने बगैर ही नियुक्ति करवा दी। तब गहलोत केसरी सिंह से इस्तीफा लेना चाहते थे, लेकिन वे उपलब्ध ही नहीं हुए। अब भाजपा सरकार में भी अध्यक्ष यूआर साहू के साथ साथ पूर्व आईपीएस हेमंत प्रियदर्शी, और डॉ. सुशील बिस्सू की सदस्य के पद पर नियुक्त हो चुकी है। यानी आयोग में अध्यक्ष सहित चार सदस्य भाजपा और तीन सदस्य कांग्रेस शासन के हैं। आयोग में अध्यक्ष सहित दस सदस्यों का प्रावधान है। ऐसे में मौजूदा समय में तीन पद रिक्त हैं।

- Advertisement -
Ad imageAd image

‘Awarapan 2’ के गाने से अरिजित सिंह की वापसी की चर्चा तेज, मैनेजर ने बताया क्या है पूरा सच

Awarapan 2: फिल्म 'आवारापन 2' का टाइटल ट्रैक 'ये आवारापन' रिलीज होने के

Jharkhand Andolankari: झारखंड आंदोलनकारियों ने उठाई अधिकारों की मांग, समान पेंशन और 20% क्षैतिज आरक्षण पर जोर

Report: Ratan kumar Jharkhand Andolankari जामताड़ा में आयोजित झारखंड आंदोलनकारियों की प्रमंडलीय