रिपोर्ट: प्रशांत जोशी, एडिट- विजय नंदन
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोड़ेकुर्सी थाना क्षेत्र में धर्मान्तरण को लेकर उपजा एक विवाद इतना बढ़ गया कि एक मृतक का शव तीन दिनों तक अंतिम संस्कार के लिए रखा रहा। ग्रामीणों की सख्त आपत्ति के बाद पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन बात नहीं बनी। अंततः शव को कांकेर से दूर रायपुर में दफनाने के लिए भेजना पड़ा है।

गाँव में दफनाने को लेकर ज़िद
मामला एक धर्मान्तरित व्यक्ति मनीष निषाद से जुड़ा है, जिसकी मृत्यु 4 नवंबर की शाम बीमारी के कारण हो गई थी। जब परिजन शव को उनके गृह ग्राम में दफनाने की प्रक्रिया शुरू करने लगे, तो ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया।
ग्रामीणों के विरोध के चलते शव का अंतिम संस्कार रुक गया। मृतक के परिजनों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाने की कई कोशिशें की, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे।

थाने में रखा गया शव, समुदाय का घेराव
जब पुलिस और ग्रामीणों के बीच कोई नतीजा नहीं निकला, तो मृतक के परिजन भी ज़िद पर अड़ गए कि शव को उसी गाँव में दफनाया जाएगा। ज़िद में आकर वे शव को थाने में ही छोड़कर चले गए। हालाँकि थाने के अधिकारियों ने तत्काल शव को अस्पताल में सुरक्षित रखवा दिया। इसके अगले ही दिन, ईसाई समुदाय के दर्जनों लोगों ने थाने का घेराव कर दिया और अपनी मांग पर अड़े रहे। लेकिन पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई समाधान नहीं निकल पाया।

चारामा में भी विरोध, रायपुर ले जाया गया शव
दो दिनों तक चले इस गतिरोध के बाद आज (6 नवंबर को) प्रशासन ने ईसाई समुदाय को समझाया जिसके बाद समुदाय के लोग चारामा के कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए सहमत हो गए। लेकिन जैसे ही शव को चारामा क्षेत्र के बाहर लाया गया, वहाँ के ग्रामीणों ने भी उसे रोक दिया। प्रशासन ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने चारामा क्षेत्र में भी दफनाने की अनुमति नहीं दी। दोनों जगह विरोध होने और किसी भी गाँव में अंतिम संस्कार की जगह न मिलने के कारण, प्रशासन ने आखिरकार शव को कांकेर जिले से बाहर रायपुर भेज दिया है, जहाँ अब उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।





