कोर्ट परिसर में क्लर्क की आत्महत्या से न्यायिक महकमे में उबाल

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The judicial department is in turmoil due to the suicide of a clerk in the court premises

रिपोर्ट- विष्णु गौतम

दुर्ग।
दुर्ग जिला सिविल कोर्ट में काम कर रहे क्लर्क सोमनाथ ठाकुर की आत्महत्या ने पूरे न्यायिक महकमे को झकझोर कर रख दिया है। मृतक कर्मचारी के समर्थन में न्यायिक कर्मचारी संघ दुर्ग के बैनर तले बुधवार को कोर्ट परिसर में 600 से अधिक कर्मचारियों ने काम बंद कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि एक ‘प्रेरित हत्या’ करार दिया है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आत्महत्या से पहले छोड़ा गया सुसाइड नोट

संघ के अध्यक्ष मनोहर कुमार ने बताया कि आत्महत्या से पूर्व सोमनाथ ठाकुर ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न और अत्यधिक कार्यभार डालने का आरोप लगाया गया है। संघ का कहना है कि सोमनाथ पर इतना दबाव डाला गया कि वह डिप्रेशन में चला गया और यह दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाने को मजबूर हो गया।

न्याय की मांग, नहीं तो आंदोलन

न्यायिक कर्मचारी संघ ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो यह आंदोलन पूरे राज्य में फैल सकता है।

कर्मचारी बोले – बढ़ते दबाव से मुश्किल हो रहा काम

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि कोर्ट में लगातार कार्यभार बढ़ता जा रहा है, वहीं वरिष्ठ अधिकारियों की प्रताड़ना ने काम का माहौल और भी असहनीय बना दिया है। कर्मचारियों का कहना था कि सोमनाथ ठाकुर की मौत केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे न्यायिक कर्मचारियों के आत्मसम्मान पर हमला है।

हाई कोर्ट तक लड़ाई ले जाने की तैयारी

संघ ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो मामले को हाई कोर्ट तक ले जाया जाएगा। इसके लिए विधिवत याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। कर्मचारियों की यह एकजुटता अब राज्यभर में एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।

मुख्य बिंदु:

  • दुर्ग कोर्ट में क्लर्क की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों में आक्रोश
  • न्यायिक कर्मचारी संघ ने 600 से अधिक कर्मचारियों के साथ किया प्रदर्शन
  • वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप
  • एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग
  • कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
  • मामला हाई कोर्ट तक ले जाने की तैयारी
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