BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय को आज तीन नए न्यायाधीश मिल गए हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की शीर्ष अदालत में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी।
कॉलेजियम की सिफारिश पर लगी मुहर
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में नियुक्त करने की सिफारिश की थी। इनमें कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी अंजारिया, गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विजय बिश्नोई और बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर के नाम शामिल थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह के बाद इन नियुक्तियों को स्वीकृति दी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय के सेवानिवृत्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में तीन सीटें खाली हुई थीं। इन्हीं रिक्तियों को भरने के लिए ये नियुक्तियां की गई हैं।
न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया का परिचय
न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया ने 1988 में वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन शेलत के अधीन गुजरात उच्च न्यायालय में अपने वकालत जीवन की शुरुआत की। उन्होंने संवैधानिक, श्रम, सेवा और नागरिक मामलों में गहरा अनुभव प्राप्त किया। वर्ष 2011 में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और दो वर्ष बाद 2013 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। फरवरी 2024 में वे कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे।
न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई का प्रोफाइल
वर्ष 1989 में वकालत शुरू करने वाले विजय बिश्नोई ने राजस्थान हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जोधपुर में विविध मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने केंद्र सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं। 2013 में राजस्थान हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए और 2015 में स्थायी पद मिला। 2024 में उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर का करियर
अतुल एस चंदुरकर ने 1988 में वकालत की शुरुआत मुंबई में की और बाद में 1992 में नागपुर स्थानांतरित हो गए। उन्होंने विभिन्न अदालतों में कानूनी सेवाएं दीं और कई जटिल मामलों में पक्ष रखा। उन्हें 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल को पेशेवर दक्षता और न्यायिक समझ के लिए सराहा गया है।





