Mohit Jain
ग्वालियर जिले के डबरा और भितरवार ब्लॉक में प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते कुछ दिनों में लगभग आधे खेतों में धान की पराली जलाई गई है। रातभर जलती आग से क्षेत्र का वातावरण धुएँ से भर रहा है और स्थानीय लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है।

सख्त आदेश और भारी जुर्माना भी नहीं रोक पाए किसान
प्रशासन ने धान कटाई शुरू होने से पहले ही पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ सख्त आदेश जारी किए थे। कलेक्टर ने भूमि के अनुसार ढाई हजार से पंद्रह हजार रुपये तक का जुर्माना तय किया था। कृषि विभाग ने चेताया था कि पराली जलाना न सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी बुरा प्रभाव डालता है। इसके बावजूद किसान इन आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
रात के अंधेरे में गुपचुप जल रही पराली, कार्रवाई भी असरहीन
स्थानीय लोगों के अनुसार किसान अधिकतर रात के समय अंधेरे का फायदा उठाते हुए पराली जलाते हैं ताकि प्रशासन को जानकारी न मिल सके। भितरवार में पहले भी 11 किसानों पर कार्रवाई की गई, लेकिन मुआवजा वसूली न होने से किसानों में सख्ती का डर खत्म हो गया है। यही कारण है कि अब खुलेआम आदेशों की अवहेलना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं की संभावना भी बढ़ा देता है।





