State Health Department: बिहार में आम जनता को सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रही है। बिहार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्य के सभी प्रमंडलों के क्षेत्रीय अपर निदेशक, सभी जिलों के सिविल सर्जन (Civil Surgeons) और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ आला अधिकारी शामिल हुए, जिन्हें स्वास्थ्य मंत्री ने जमीनी स्तर पर सेवाओं में सुधार के कड़े निर्देश दिए।
State Health Department: अस्पतालों में मरीजों की मदद के लिए दुरुस्त होंगे “May I Help You” डेस्क
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने स्पष्ट किया कि राज्य के हर नागरिक तक बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ओपीडी (OPD) में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की भारी भीड़ को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके साथ ही, मरीजों को लंबी लाइनों से निजात दिलाने के लिए ‘टोकन डिस्प्ले सिस्टम’ (Token Display System) के जरिए कतार प्रबंधन को बेहतर बनाने और औषधि वितरण व पैथोलॉजी केंद्रों पर सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

State Health Department: जिला अस्पतालों में 15 जुलाई से लागू होगा नया रेफरल सिस्टम
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आगामी 15 जुलाई से राज्य के सभी जिला अस्पतालों में एक नई और प्रभावी रेफरल प्रणाली (Referral System) लागू की जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को मुकम्मल इलाज मुहैया कराना है। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को मामूली समस्याओं के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर न किया जाए। जब अत्यंत आवश्यकता हो, तभी मरीज को उच्च चिकित्सा संस्थानों (मेडिकल कॉलेजों) में भेजा जाए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सके।

State Health Department: स्थानीय स्तर पर पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जिला और अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में ही रेडियोलॉजी (एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड) और पैथोलॉजी (खून-पेशाब की जांच) की सेवाएं पूरी तरह चाक-चौबंद होनी चाहिए। मरीजों को जांच या दवाओं के लिए बाहर न भटकना पड़े, इसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित जिले के सिविल सर्जन की होगी। बैठक के अंत में विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मंत्री जी को आश्वस्त किया कि इन सभी कल्याणकारी और सुधारात्मक निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन नियत समय के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।





