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Sagar: निलेश आदिवासी आत्महत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दिए SIT गठन के निर्देश, पूर्व गृहमंत्री की भूमिका की होगी जांच

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Sagar: मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुए निलेश आदिवासी आत्महत्या मामले ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे 48 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि स्थानीय पुलिस से इस मामले में स्वतंत्र और बेपरवाह जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए बाहरी और तटस्थ अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है।

Sagar: SIT की संरचना पर सुप्रीम कोर्ट के विशेष निर्देश

कोर्ट ने SIT की टीम को लेकर भी स्पष्ट दिशानिर्देश दिए। आदेश के अनुसार—

  1. एसआईटी का प्रमुख राज्य के बाहर से आए सीधे भर्ती वाले एसएसपी रैंक के आईपीएस अधिकारी को बनाया जाए।
  2. टीम में शामिल दूसरे अधिकारी के रूप में किसी युवा आईपीएस को रखा जाए, जिसकी जड़ें मध्य प्रदेश से न जुड़ी हों।
  3. तीसरा सदस्य किसी महिला पुलिस अधिकारी को बनाया जाए, जो डिप्टी एसपी से ऊपर के पद पर हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह टीम तुरंत FIR संख्या 329/2025 सहित सभी संबंधित रिकार्ड अपने कब्जे में ले और एक माह के भीतर जांच पूरी करे। अदालत ने इस दौरान गवाहों पर किसी प्रकार का दबाव या प्रभाव न पड़ने देने के लिए गवाह सुरक्षा योजना लागू करने पर भी जोर दिया।

पत्नी के आरोपों के बाद मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

यह मामला तब शुरू हुआ जब 25 जुलाई को मालथौन कस्बे में 42 वर्षीय निलेश आदिवासी ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना के बाद उनकी पत्नी रेवाबाई ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उनके पति को राज्य के पूर्व गृहमंत्री और उनके सहयोगियों द्वारा लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

रेवाबाई ने 27 जुलाई और 3 अगस्त को थाने में शिकायतें भी दर्ज कराई थीं, लेकिन कार्रवाई की कमी के बाद वे पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। रेवाबाई का आरोप है कि राजनीतिक दबाव में मामले की सही जांच नहीं हो रही थी।

परिवार के भीतर अलग-अलग बयान, जांच और अधिक जटिल

दिलचस्प बात यह है कि निलेश के भाई नीरज आदिवासी ने पुलिस को दिए बयान में पूरी तरह अलग घटनाक्रम पेश किया। नीरज ने स्थानीय भाजपा नेता गोविंद सिंह मालथौन और कुछ अन्य लोगों को घटना के लिए जिम्मेदार बताया। बाद में पुलिस ने गोविंद सिंह मालथौन के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की।इसी मामले में रेवाबाई और गोविंद सिंह दोनों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि चूंकि मामला बेहद संवेदनशील है और बयान एक-दूसरे के विपरीत हैं, इसलिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक, लेकिन गंभीर सामग्री मिलने पर कार्रवाई संभव

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक SIT अपनी रिपोर्ट नहीं देती, तब तक गोविंद सिंह मालथौन की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि जांच दल को उनके खिलाफ कोई गंभीर और आपत्तिजनक साक्ष्य मिलता है, तो वह कस्टोडियल पूछताछ के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांग सकता है।

हाई कोर्ट को भी निर्देश

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से कहा है कि वह रेवाबाई द्वारा दायर रिट याचिका (31491/2025) का जल्द निपटारा करे और यह ध्यान रखे कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन हो।

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