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33 साल पहले सचिन तेंदुलकर ने शुरू की ये परंपरा, बोले- “हिन्दुस्तान के लिए खेल रहा हूं, किसी बोर्ड के लिए नहीं”

33 साल पहले सचिन तेंदुलकर ने शुरू की ये परंपरा, बोले- “हिन्दुस्तान के लिए खेल रहा हूं, किसी बोर्ड के लिए नहीं”

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने देश के लिए खेलने का जो जज्बा दिखाया, वह आज भी हर भारतीय क्रिकेट फैन के दिल में जीवित है। 33 साल पहले सचिन ने एक नई परंपरा की शुरुआत की, जो आज भी टीम इंडिया में कायम है।

मास्टर ब्लास्टर ने अपने हेलमेट पर तिरंगा लगाकर खेलना शुरू किया और कहा था:

“मैं हिन्दुस्तान के लिए खेल रहा हूं, किसी बोर्ड के लिए नहीं।”

उनकी इस आदत ने न केवल देशभक्ति का संदेश दिया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मिसाल कायम की।


1992 में हुई नई शुरुआत

साल 1992 में सचिन ने अपने हेलमेट पर तिरंगा लगाकर खेलने की शुरुआत की। उनसे जब इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि वह किसी बोर्ड के लिए नहीं, बल्कि अपने देश के लिए खेलते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • हेलमेट पर तिरंगा लगाने की परंपरा सचिन द्वारा शुरू की गई।
  • यह आज भी भारतीय क्रिकेट में एक प्रतीक के रूप में जारी है।

1996 वर्ल्ड कप में बैट का खास फैसला

सचिन ने साल 1996 के वर्ल्ड कप में अपने बैट पर किसी भी कंपनी का स्टिकर नहीं लगाया। इसका कारण था कि उन्होंने पहले दो मैच बिना स्टिकर वाले बैट से शानदार रन बनाए।

सचिन का कहना था:

  • चाहे कोई कितने भी पैसे दे, लेकिन पूरे वर्ल्ड कप में वही बैट इस्तेमाल करेंगे।
  • इस फैसले ने उनकी सादगी और देशभक्ति को दर्शाया।

वास्तव में, इस वर्ल्ड कप में सचिन तेंदुलकर ने सबसे ज्यादा रन बनाकर अपनी काबिलियत साबित की।


शराब और तंबाकू के विज्ञापन से किया था इंकार

साल 2010 में सचिन ने विजय माल्या की कंपनी का शराब का एड करने से मना कर दिया। कंपनी उन्हें 20 करोड़ रुपये देने वाली थी, लेकिन सचिन ने कहा:

“मैं कभी भी शराब या तंबाकू का विज्ञापन नहीं करूंगा। मैं कभी गलत उदाहरण नहीं दूंगा।”

अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच में सचिन की बैट पर लगी ग्रिप भी तिरंगे के रंग में थी, यह दिखाने के लिए कि उनका क्रिकेट केवल देश के लिए था।


सचिन तेंदुलकर की विरासत

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज।
  • सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज।
  • अपने फैंस और देश के लिए खेलना हमेशा प्राथमिकता।

सचिन तेंदुलकर ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि देशभक्ति और नैतिकता की मिसाल भी कायम की। उनका यह दृष्टिकोण आज भी युवा क्रिकेटरों और फैंस के लिए प्रेरणा है।

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