BY: MOHIT JAIN
मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ग्वालियर एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां आगामी 29 और 30 अगस्त 2025 को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन प्रदेश में पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस कॉन्क्लेव में निवेशकों से सीधा संवाद करेंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। आयोजन स्थल राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय होगा।
क्यों खास है यह कॉन्क्लेव?
राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य है:
- पर्यटकों की संख्या में वृद्धि
- पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग बढ़ाना
- निवेश को आकर्षित कर क्षेत्रीय विकास को गति देना
इस बार कॉन्क्लेव की थीम है:
टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ लेगेसी
निवेश और नए अवसर
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि कॉन्क्लेव में:
- होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस और इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स के लिए Letter of Award (LoA) दिए जाएंगे
- MoU और अनुबंध साइन होंगे
- स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार मिलेगा
- क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व और मजबूती मिलेगी
साथ ही एक विशेष पर्यटन प्रदर्शनी भी आयोजित होगी, जिसमें शामिल होंगे:
- मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल
- हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स और होम-स्टे
- हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स
- साहसिक गतिविधियां और सांस्कृतिक धरोहर
दो बड़े सत्र होंगे खास आकर्षण
कॉन्क्लेव में दो प्रमुख पैनल डिस्कशन होंगे:
- टूरिज़्म ऐज़ अ कल्चरल ब्रिज- ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ एमपी
- ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर
- शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला
- वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर पहचान
- ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग- इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्ज़री एंड एक्सपीरियंस
- विरासत पर्यटन
- लग्ज़री स्टे और डेस्टिनेशन वेडिंग
- अनुभवात्मक पर्यटन के नए अवसर
यह खबर भी पढें: मोहन कैबिनेट में नए मेडिकल कॉलेज और इंदौर-उज्जैन मेट्रो विस्तार पर हो सकती है चर्चा
ग्वालियर का यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव न केवल प्रदेश में निवेश बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगा। इससे ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।





