रिपोर्ट- नेमिचंद बंजारे
राजिम (फिंगेश्वर)। छत्तीसगढ़ के देवरी गांव में हर साल ऋषि पंचमी पर्व पर अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस मौके पर गांव के लोग बड़ी संख्या में एकत्र होकर सांपों की पूजा करते हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का भी अनूठा उदाहरण पेश करती है।
सांपों की शोभायात्रा और पूजा
ऋषि पंचमी के अवसर पर सावरा समिति के लोग विभिन्न स्थानों से सांपों को पकड़ते हैं। फिर गांव में शोभायात्रा निकालकर जगह-जगह उनकी पूजा की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद सभी सांपों को जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।
संरक्षण के लिए गुरु पाठशाला
देवरी गांव में सांपों के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित ढंग से पकड़ने की शिक्षा देने के लिए सावरा गुरु पाठशाला चलाई जा रही है। यहां लोगों को सांप पकड़ने और उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना जंगलों में छोड़ने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
गुरु कमलेश का अनुभव
पाठशाला के गुरु कमलेश बताते हैं कि वे पिछले 32 वर्षों से सांप पकड़ रहे हैं। अब तक वे 400 से अधिक सांपों को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ चुके हैं। उनका कहना है कि यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि सांपों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए भी बेहद अहम है।
धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का संगम
देवरी गांव में मनाया जाने वाला यह पर्व न सिर्फ आस्था और परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को वन्यजीव संरक्षण का संदेश भी देता है। यहां की अनोखी परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर को और समृद्ध करती है।





