पेरू में GenZ का गुस्सा: भ्रष्टाचार और पेंशन सुधारों के खिलाफ सड़कों पर युवाओं का सैलाब, ‘लूफी’ बना प्रतीक

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BY: VIJAY NANDAN

लीमा: नेपाल के बाद अब दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में भी युवा सड़क पर उतर आए हैं। भ्रष्टाचार, बढ़ते अपराध और पेंशन प्रणाली में बदलाव को लेकर GenZ पीढ़ी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रही है। 27 सितंबर को राजधानी लीमा में हजारों छात्रों और युवाओं ने राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते के खिलाफ नारे लगाए और विरोध मार्च निकाला।

पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़पें

यह विरोध 20 सितंबर को शुरू हुआ था। इस दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव हुआ। सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जबकि युवाओं ने पथराव और आगजनी कर विरोध जताया।

नए पेंशन नियमों से भड़के युवा

हाल ही में सरकार ने पेंशन सिस्टम को लेकर नया कानून लागू किया है। पहले यह वैकल्पिक था, अब 18 वर्ष से अधिक उम्र के हर नागरिक के लिए किसी न किसी पेंशन प्रदाता से जुड़ना अनिवार्य कर दिया गया है।
युवाओं का कहना है कि –

  • नौकरी नहीं मिलने की स्थिति में वे पेंशन में योगदान कैसे करेंगे
  • पेंशन संस्थाओं में पारदर्शिता की कमी है
  • सरकार को रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, जबरन पेंशन योजना नहीं थोपनी चाहिए

पेरू की राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी के मुताबिक, देश की 27% आबादी 18–29 साल की उम्र के बीच है और यही वर्ग इस आंदोलन की रीढ़ है।

‘वन पीस’ के लूफी बने प्रेरणा स्रोत

इस आंदोलन में युवाओं ने जापान की मशहूर मंगा और ऐनिमे सीरीज़ ‘वन पीस’ के किरदार मंकी डी. लूफी को अपना प्रतीक बनाया है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में लूफी की पहचान वाला खोपड़ी का झंडा देखा जा सकता है।
छात्र नेता लियोनार्डो मुन्योस ने कहा – “लूफी भ्रष्ट और तानाशाही शासकों को चुनौती देकर जनता को आज़ादी दिलाता है, पेरू में भी वही स्थिति है, अब चुप नहीं रहेंगे।”
एक अन्य छात्र सैंटियागो जापाटा ने कहा – “हम मौत और भ्रष्टाचार को सामान्य मानने से थक चुके हैं। सरकार को जनता से डरना चाहिए, जनता को सरकार से नहीं।”

गहराता राजनीतिक असंतोष

प्रिंसटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जो-मैरी बर्ट के मुताबिक, पेरू में असंतोष लंबे समय से बढ़ रहा है। बोलुआर्ते सरकार पर अदालतों और निगरानी संस्थानों को कमजोर करने के आरोप लग रहे हैं, जो 1990 के दशक में अल्बर्टो फुजीमोरी के दौर की याद दिलाता है। जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति की लोकप्रियता केवल 2.5% पर और संसद की साख 3% तक सिमट गई है।

खनन उद्योग पर असर

प्रदर्शनों का असर पेरू की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। देश तांबा, सोना और चांदी का बड़ा उत्पादक है। खनन कंपनी हडबे मिनरल्स ने हाल ही में बताया कि विरोध प्रदर्शनों के चलते उसने अपनी कॉन्स्टैंसिया खदान में मिल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

नेपाल में भी उठा GenZ का आंदोलन

पेरू से पहले नेपाल में भी अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम को लेकर GenZ गुटों में विवाद हुआ। सेना मुख्यालय के बाहर दो समूहों में झड़प हो गई जिसमें कई युवक घायल हो गए।

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