रिपोर्टर: लोकेश्वर सिन्हा
गरियाबंद जिले में संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से जिला पंचायत के सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप, उपाध्यक्ष लालिमा ठाकुर, शिक्षक एवं भाषा विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यशाला में उठाए गए मुद्दे
कार्यशाला में वक्ताओं ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने वर्तमान समय में संस्कृत की उपयोगिता और इसकी प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला। यह भी विचार-विमर्श हुआ कि किस प्रकार नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।
संस्कृत भाषा का सांस्कृतिक महत्व
संस्कृत को हमारी सांस्कृतिक जड़ों की आत्मा बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह भाषा न केवल प्राचीन साहित्य का स्त्रोत है, बल्कि आधुनिक ज्ञान और विज्ञान की भी आधारशिला रही है। इसीलिए इसे न केवल संरक्षण की आवश्यकता है, बल्कि इसे जनमानस तक पहुँचाने के लिए विशेष कदम उठाने होंगे।
शिक्षकों की मांग
कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों ने यह प्रस्ताव रखा कि संस्कृत को स्कूलों में वैकल्पिक विषय के बजाय अनिवार्य विषय बनाया जाए ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसे सीखें और इसकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ें।





