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मध्यप्रदेशः हाईकोर्ट का फैसला, अब 12 साल पुरानी बसों पर रोक

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देश की राजधानी दिल्ली में 12 साल पुरानी गाड़ियों पर रोक है, वहां प्रमुख कारण प्रदूषण और फिटनेस को माना जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश में 12 साल से अधिक पुराने वाहन रोडों पर रफ्तार से दौड़ रहे है। स्थिति ऐसी है कि इन वाहनों की फिटनेस तक जर्जर स्थिति में है यही कारण है कि आए दिन हादसें होते रहते है। लेकिन अब मध्यप्रदेश में 12 साल पुराने वाहन रोडों पर नहीं दौड़ सकेंगे। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई पर यह फैसला सुनाया है। दरअसल, 7 साल पहले एक स्कूल बस हादसें में चालक सहित 4 बच्चों की मौत हो गई थी। जिसके चलते याचिका दायर की गई थी लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। साथ ही हाईकोर्ट ने गाइड लाइन भी जारी की है।

5 जनवरी 2018 को हुआ था हादसा
5 जनवरी 2018 को दिल्ली पब्लिक स्कूल निपानिया की बस बायपास पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में चार विद्यार्थियों और बस ड्राइवर की जान चली गई थी। इसके बाद शहर के लोगों और अभिभावकों ने स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह अहम फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
व्यक्तिगत ऑटो.रिक्शा में ज्यादा से ज्यादा चार विद्यार्थी ही बैठ सकेंगे। इस नियम का पालन कराने की ज़िम्मेदारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी यानि आरटीओए पुलिस अधीक्षक एसपी और पुलिस उपाधीक्षक सीएसपी ट्रैफिक की होगी। प्रत्येक स्कूल को किसी वरिष्ठ शिक्षक या कर्मचारी को वाहन प्रभारी नियुक्त करना होगा। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिवए राज्य शिक्षा विभागए सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों का पालन करवाने के आदेश दिए हैं।

ये दिए निर्देश
.स्कूल बस का रंग पीला हो और स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो। वाहन के आगे-पीछे नाम, पता और विद्यालय के वाहन प्रभारी का मोबाइल नंबर दोनों तरफ 9 इंच की बोर्ड पट्टी पर हो।
.खिड़कियों पर जालीदार ग्रिल, मोटर वाहन नियम के तहत हो।
.शीशों पर रंगीन फिल्म और पर्दे भी रंगीन नहीं होंगे।
.स्कूल बस में प्राथमिक चिकित्सा किट, अग्निशामक यंत्र होगा। प्राथमिक चिकित्सा में प्रशिक्षित परिचारक होगा।
.ड्राइवर के पास न्यूनतम 5 वर्ष भारी वाहन चलाने का अनुभव।
.संस्था शपथ-पत्र देगी कि खतरनाक ड्राइविंग नहीं होगी। बस में स्पीड गवर्नर लगा हो।
.सीट के नीचे स्कूल बैग रखने की जगह हो। दाईं ओर आपात द्वार होगा। दरवाजों में लॉकिंग प्रणाली जरूरी होगी।
.स्कूल बसों में प्रेशर हॉर्न नहीं लगाया जाएगा। रात में इनका संचालन नहीं होगा व अंदर नीले रंग के बल्ब लगे हों।
.बसों का नियमित रखरखाव एवं साफ.सफाई हो। फिटनेसए वैध बीमाए प्रदूषण नियंत्रण और टैक्स के भुगतान प्रमाण.पत्र जरूरी।
.कोई भी स्कूल बस 12 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होगी।

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