Report: Rashid
Lucknow उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को 19वीं रमजान का ऐतिहासिक जुलूस पूरी अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। अमीर-उल-मोमिनीन हजरत अली की शहादत की याद में निकले इस जुलूस में मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग शामिल हुए। पुराने लखनऊ की गलियां ‘या अली’ की सदाओं से गूंज उठीं और पूरा माहौल गमगीन नजर आया।
पुराने लखनऊ के पारंपरिक मार्गों से गुजरा कारवां
Lucknow जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों से होता हुआ पुराने लखनऊ के विभिन्न ऐतिहासिक इलाकों से गुजरा। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे काले लिबास पहनकर जुलूस का हिस्सा बने। अकीदतमंदों ने मातम और नौहाख्वानी के जरिए हजरत अली को खिराज-ए-अकीदत पेश की। रास्ते भर समाजसेवी संगठनों द्वारा पानी और सबील के भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: ड्रोन और CCTV से निगरानी
Lucknow जुलूस की संवेदनशीलता और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे।
- तकनीकी निगरानी: पूरे रूट की निगरानी ड्रोन कैमरों और हाई-डेफिनिशन CCTV के जरिए कंट्रोल रूम से की जा रही थी।
- सुरक्षा बल: सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल के साथ ATS (आतंकवाद निरोधक दस्ता), RRF (रैपिड रिस्पांस फोर्स) और सिविल डिफेंस के वालंटियर्स तैनात रहे।
सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक सहयोग
Lucknow जुलूस के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने भी अहम भूमिका निभाई। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद मौके पर मौजूद रहकर रूट डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का जायजा लिया। जुलूस के दौरान यातायात को सुचारू रखने के लिए पुराने लखनऊ के कई रास्तों पर रूट को पहले ही डायवर्ट कर दिया गया था, जिससे आम लोगों को असुविधा न हो।
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