Kerala: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में बड़ा बदलाव करते हुए ‘मुख्यमंत्री’ शब्द हटा दिया है। अब उनके परिचय में केवल माकपा (CPI-M) के पोलित ब्यूरो सदस्य होने का उल्लेख है। इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे दिया है।
Kerala: विजयन के कदम के मायने
विजयन के इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक वर्ग का मानना है कि एग्जिट पोल्स में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की संभावित बढ़त को देखते हुए यह हार का संकेत हो सकता है।
वहीं, समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक नैतिक और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें नए जनादेश से पहले पद का उल्लेख हटाना लोकतांत्रिक परंपरा माना जाता है। हालांकि, इस बदलाव का समय कई सवाल खड़े कर रहा है।
Kerala: धर्माडम सीट पर कड़ा मुकाबला

मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan अपनी पारंपरिक धर्माडम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा माना जा रहा है। यूडीएफ के वीपी अब्दुल रशीद और भाजपा के के रंजीत ने इस सीट को त्रिकोणीय बना दिया है, जिससे विजयन की राह आसान नहीं रही है। हालांकि 2021 में उन्होंने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी।
Kerala: भारी मतदान ने बढ़ाई सियासी गर्मी
राज्य में 9 अप्रैल को हुए मतदान में 78.27% की रिकॉर्ड भागीदारी दर्ज की गई थी। राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता विरोधी लहर के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। ऐसे में नतीजों से पहले विजयन का यह कदम और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
Kerala: वामपंथ के लिए अस्तित्व की लड़ाई
2021 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली एलडीएफ सरकार के लिए इस बार चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। अगर रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो केरल में दशकों पुरानी सत्ता परिवर्तन की परंपरा एक बार फिर लौट सकती है।
यह स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर भी वामपंथी राजनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि केरल उनका प्रमुख गढ़ माना जाता है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले अंतिम नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि विजयन का यह कदम औपचारिकता था या सत्ता से विदाई का संकेत।
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