कर्नाटक ईडी रेड: सांसद तुकाराम और विधायकों पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, जानें पूरा मामला

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कर्नाटक ईडी रेड सांसद तुकाराम और विधायकों
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस सांसद ई. तुकाराम और तीन विधायकों के घरों पर छापेमारी की।
  • मामला महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम (KMVSTDC) से जुड़ा है।
  • आरोप: करोड़ों रुपये फर्जी संस्थाओं के जरिए चुनाव प्रचार में खर्च किए गए।
  • ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत की है।

ईडी की रेड का पूरा मामला

कर्नाटक की राजनीति उस समय गर्मा गई जब ईडी ने कांग्रेस सांसद ई. तुकाराम और तीन विधायकों के ठिकानों पर छापेमारी की। ये कार्रवाई वाल्मीकि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते की गई।

ईडी के सूत्रों के मुताबिक, महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम (KMVSTDC) के खातों से करोड़ों रुपये कथित तौर पर फर्जी संस्थाओं को ट्रांसफर किए गए। यही पैसे बाद में 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार पर खर्च किए गए।


क्या है महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम?

  • स्थापना वर्ष: 2006
  • उद्देश्य: अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए योजनाएं लागू करना।
  • कार्य: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किल डेवलपमेंट और स्वरोजगार जैसी योजनाओं का संचालन।

चुनावों में हुआ धन का इस्तेमाल?

ईडी का आरोप है कि वाल्मीकि फंड से निकाली गई नकदी का उपयोग चुनाव प्रचार में किया गया। खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों में बेल्लारी सीट पर इस पैसे का “धड़ल्ले से इस्तेमाल” हुआ।


CBI और कर्नाटक पुलिस की भूमिका

इस मामले में पहले से ही कर्नाटक पुलिस और CBI ने प्राथमिक जांच शुरू की थी। उनके द्वारा दर्ज FIR के आधार पर अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है।


ED की अब तक की कार्रवाई

  • सर्च लोकेशन्स: बेंगलुरु, बेल्लारी, और अन्य ठिकाने
  • जिन पर छापा पड़ा:
    • सांसद ई. तुकाराम
    • कांग्रेस के तीन विधायक (नामों का खुलासा नहीं)
  • सीज की गई संपत्तियाँ: डिजिटल दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, लैपटॉप और मोबाइल डिवाइस

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस रेड के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा का कहना है कि “कानून अपना काम कर रहा है” और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।

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सारांश: क्यों अहम है ये मामला?

यह मामला सिर्फ एक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीति, सत्ता और आदिवासी कल्याण निधियों के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

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