Ram Mandir Donation : चढ़ावे में चोरी, बख्शे नहीं जाएंगे दोषी, 140 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार

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Ram Mandir Donation row sit probe ayodhya

Ram Mandir Donation : अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित एसआईटी ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है। शुरुआती जांच रिपोर्ट में चढ़ावे के संग्रहण, गणना और जमा प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। एसआईटी ने मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, रिकॉर्ड रजिस्टर और बैंकिंग दस्तावेजों का भी मिलान किया गया। दावा है कि रिपोर्ट में जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आ सकते हैं।

Ram Mandir Donation : SIT की जांच पूरी, सामने आई गड़बड़ी

अभी तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट शासन और संबंधित अधिकारियों को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले को लेकर श्रद्धालुओं और आम जनता की नजरें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। लेकिन जिस तरह से ट्रस्ट के कई बड़े नाम इस पूरे मामले में सामने आ रहे हैं। उससे सियासी पारा लगातार चढ़ा हुआ है, अब मामले हाईकोर्ट भी जा पहुंचा है। आगे कब क्या होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। इसी मुद्दे पर हम चर्चा

Ram Mandir Donation

Ram Mandir Donation : अब होगा ‘दूध का दूध-पानी का पानी’

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में चोरी और कथित हेरफेर के मामले में गठित एसआईटी ने लगभग अपनी जांच पूरी कर ली है। एसआईटी ने करीब 140 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें जुटाए गए साक्ष्यों और तथ्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। दावा किया जा रहा है कि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। मंदिर से जुड़े कुछ सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है। जिसके संकेत साफ हैं कि जांच एजेंसियां महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। दावा किया जा रहा है कि एसआईटी की जांच सिर्फ फंड की कथित हेराफेरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग फेज में मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीन और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है। जांच में ट्रस्ट के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए गए हैं।आरोप ये भी लगाए जा रहे हैं कि मंदिर ट्रस्ट ने मार्केट रेट से ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदी थीं। अब प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद जिन अनियमितताओं के खुलासे की संभावना जताई जा रही है उनमें ।

Ram Mandir Donation : दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

• करीब 200 किलो चांदी की ईंटों के रिकॉर्ड, रसीदों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
• कुछ शिकायतकर्ताओं ने दान सामग्री के हिसाब-किताब में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप लगाया है।
• दान पेटी से निकाली गई नकदी, सोने-चांदी के रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी के मिले हैं संकेत।
• मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों व निर्माण सामग्री खरीद में हेराफेरी की संदेश।
• एसआईटी ने करीब 140 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट की है तैयार।
• साक्ष्यों और तथ्यों का रिपोर्ट में विस्तार से उल्लेख, CCTV फुटेज से भी छेड़छाड़ के मिले संकेत।
• SIT ने ट्रस्ट के अधिकारियों, मंदिर के कर्मचारियों, बैंक के कर्मचारियों से की पूछताछ।
• SIT ने टीसीएस (TCS) कर्मियों सहित 150 से अधिक संदिग्धों के बयान दर्ज किए।
• ट्रस्ट के निर्माण प्रभारी गोपाल राव, ट्रस्टी अनिल मिश्र और अन्य लोगों की भूमिका संदिग्ध।

अब जल्द ही एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। इससे पहले प्रारंभिक रिपोर्ट में गबन और गंभीर अपराध पाए जाने के बाद एसआईटी अब स्थानीय थानों में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इधर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुकी है।याचिका में तत्काल सुनवाई की जरूरत बताते हुए सीबीआई जांच और सीएजी ऑडिट की मांग की गई है। साथ ही रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की है। हालांकि अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और मामले को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनने का निर्णय लिया है।

तो वहीं धर्म और आस्था के जुड़े इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। अब मामले में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी 24 जून को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर के नाम पर ‘संगठित लूट’ हुई है और भारी मात्रा में नकद व कीमती आभूषण चोरी हुए हैं। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI या ED से जांच की मांग कर रही है और सरकार को कटघरे में खड़ा। तो वहीं सत्ताधारी दल का आरोप है कि विपक्ष अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए भगवान राम की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल कर रहा है।

अब सियासी आरोप प्रत्यारोप जो भी हों, लेकिन राम मंदिर चूंकि देश के तमाम भक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र है, इसलिए यहां भक्तों के चढ़ावे में तथाकथित रुप से हेरा फेरी की बात भक्तों को व्यथित कर रही है।ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में धन के कथित गबन के तरीके, जिम्मेदार लोगों की भूमिका और सुरक्षा तंत्र की खामियों पर बड़ा खुलासा हो सकता है। देखना होगा कि राम मंदिर में एसआईटी की जांच रिपोर्ट में क्या खुलासा होगा और जनभावनाओं की आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर आखिर क्या गाज गिरती है।

राम मंदिर चढ़ावे में चोरी मामला, एसआईटी की जांच पूरी, प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा होने की संभाबना
अबतक की जांच में गड़बड़ी को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जल्द ही कुछ लोगों पर एक्शन की भी तैयारी कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच।अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

दान राशि पर असर रिपोर्टों के मुताबिक विवाद और जांच के बाद मंदिर में आने वाले दैनिक चढ़ावे में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि औसत दान राशि पहले की तुलना में काफी कम हुई है, जिसे जांच और आरोपों से पैदा हुए भ्रम का असर माना जा रहा है।

अब एसआईटी की रिपोर्ट और अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
मामले में एसआईटी की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद अब इस पूरे विवाद की रिपोर्ट सीएम के पास जाएगी। माना जा रहा है कि इसके बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया जा सकता है।

राम मंदिर में चढ़ावे के लेकर की गई हेरा-फेरी का विवाद तूल पकड़ रहा है। एक तरफ जहां सरकार SIT जांच करवा रही है। तो दूसरी तरफ चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर हुई है।

हाईकोर्ट में यह याचिका मोहित अशोक की ओर डाली गई है। उन्होंने हाईकोर्ट से घटना की गंभीरता बताते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से मंदिर को मिले सभी दान और चढ़ावे का ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।

अभी तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट शासन और संबंधित अधिकारियों को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले को लेकर श्रद्धालुओं और आम जनता की नजरें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है।

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है. करोड़ों राम भक्तों की नजर इस पूरे मामले में चल रही एसआईटी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है

अयोध्या के संतों का भी कहना है कि कुछ लोग इस मामले को लेकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. संतों का मानना है कि राम जन्मभूमि पर श्रद्धालुओं की आस्था मजबूत है और भक्तों के आने-जाने या दान करने में कोई बड़ी कमी नहीं आई है.

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