US 100% Tariff on India : रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रंप का शिकंजा,भारत अमेरिका रिश्तों पर बढ़ेगा व्यापारिक दबाव
US 100% Tariff on India : अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दी है, जिसमें भारत समेत पांच देशों से होने वाले आयात पर 100 % तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। यह कदम रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के मकसद से लाया गया है। अब बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पास भेजा जाएगा। दरअसल अमेरिका का तर्क है कि रूस से ईंधन खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध क्षमता को समर्थन दे रहे हैं। भारत दुनिया के बड़े रूसी कच्चे तेल खरीदारों में शामिल है, इसलिए इस प्रस्ताव का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है। लेकिन सवाल सिर्फ रूसी तेल की खरीद का नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्ता और विदेश नीति का भी है। तो क्या माना जाए कि रूसी तेल को लेकर अब भारत पर अमेरिका का दबाव है, भारत झुकेगा, या ऊर्जा हितों पर कायम रहेगा ? सवाल ये कि क्या ट्रंप सरकार का ये फैसला, उसके लिए बड़ी भूल साबित होगा।इसी मुद्दे पर करेंगे चर्चा, लेकिन पहले देखिये ये रिपोर्ट।।
US 100% Tariff on India : रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों जिसमें चीन और भारत शामिल हैं, उन पर टैरिफ लगाने वाले बिल को 86-11 वोटों के बहुमत से मंजूरी दे दी है। यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े आयातक हैं। हालांकि, ट्रंप के इस फैसले का अमेरिका में ही विरोध होने लगा है। एक अमेरिकी सीनेटर ने तो ट्रंप के इस कदम पर सवाल भी उठाए हैं, फैसले का विरोध करते हुए कहा, कि ऐसे समय में जब हम चीन के साथ चल रहे कंपटीशन में मदद करने के लिए भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, तब भारत पर 100 % टैरिफ लगाना पूरी तरह से आत्मघाती कदम है। हालांकि रूसी तेल खरीदने वाले मुल्कों पर पहले भी ट्रंप प्रशासन पाबंदी लगाता रहा है। हालांकि इस बार 100 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव बहुत ही सख्त माना जा रहा है। इस बिल को लाने के पीछे तर्क दिया गया कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है। फिलहाल यह विधेयक सीनेट में पारित हुआ है और अब इसकी परीक्षा अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में होनी है।ट्रंप के इस बिल में क्या रहेगा खास डालते हैं एक नजर…
US 100% Tariff on India : दरअसल होर्मुज स्ट्रीट में जारी संकट के चलते भारत के लिए पश्चिम एशिया से तेल पाना मुश्किल हो गया है। इससे रूसी कच्चे तेल की अहमियत और बढ़ गई। अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो भारत के सामने अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और अमेरिकी शुल्कों के जोखिम को प्रबंधित करने के बीच एक बड़ा कठिन निर्णय होगा। अब यदि यह विधेयक कानून का रूप ले लेता है तो भारत पर क्या होगा असर, डालते हैं एक नजर। भारत मौजूदा समय में अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर है। जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी लगभग 55 % रही है और यह पिछले तीन साल से 30 % से ज्यादा बनी हुई है। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने की संभावना कम है, अगर भारत इस तेल के आयात में केवल एक-तिहाई की भी कटौती करता है तो इसे अन्य महंगे विकल्पों से बदलने के कारण भारत को सालाना 1 से 1.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ेगा। अगर ऐतिहासिक रूप से देखें तो
US 100% Tariff on India : ऐसे में अगर प्रतिबंध सीधे कंपनियों पर लगते हैं तो भारत को इस संकट से निपटने के लिए फिर से अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट के लिए कूटनीतिक बातचीत करनी पड़ सकती है।लेकिन अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ वाले विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार की विदेश और आर्थिक नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारत कितना और किससे ईंधन खरीदे, यह फैसला भारत को करना चाहिए, अमेरिका को नहीं। आज जो भी आता है, भारत को धमकाता है। अपनी शर्तें थोपता है। लेकिन सरकार को का मानना है कि चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। फरवरी में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से भारत की निर्भरता रूसी तेल पर बढ़ी है। भारत को नहीं लगता कि इस नए बिल का असर अमेरिका से चल रही व्यापार वार्ता पर होगा। इस ट्रेड डील में रूस से तेल खरीदने पर लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ रुकावट नहीं बन सकते।
US 100% Tariff on India : बहरहाल अब अमेरिका के 100 % टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि जो मोदी-ट्रंप की दोस्ती और कैमिस्ट्री की बाते कही जाती हैं वो इस मुद्दे पर कितना समाधान निकाल सकती है।
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