Jhansi Chirgaon Silver Coins Found बुंदेलखंड के झांसी जिले के अंतर्गत आने वाले चिरगांव कस्बे में उस समय अचानक सनसनी फैल गई, जब एक मकान के निर्माण कार्य के दौरान प्राचीन काल के कथित चांदी के पुराने सिक्के मिलने की खबर सामने आई। सिक्के मिलने की सूचना हवा की तरह पूरे कस्बे में फैल गई, जिसके बाद मौके पर सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालात यह हो गए कि लोग मिट्टी के ढेरों में बैठकर अपने स्तर पर सिक्कों की तलाश करने लगे।

Jhansi Chirgaon Silver Coins Found बच्ची को मिले सिक्के से हुआ कौतूहल का खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिरगांव कस्बे में स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर के ठीक सामने एक पुराने मकान को गिराकर जेसीबी (JCB) मशीन से नींव की खुदाई का कार्य चल रहा था। खुदाई के दौरान जो मिट्टी निकल रही थी, उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से महाकालेश्वर मंदिर के रास्ते से होते हुए तालापुरा स्थित तालाब के पास डंप (डाला) किया जा रहा था।

इसी डंप की गई मिट्टी के पास खेल रही एक छोटी बच्ची को अचानक चमकता हुआ चांदी का पुराना सिक्का मिला। बच्ची ने जब यह सिक्का अपने घर पर दिखाया, तो परिजन उत्सुकतावश तालाब के पास पहुँचे और मिट्टी को खंगालने लगे। इस दौरान उन्हें और कुछ अन्य लोगों को भी कुछ और सिक्के हाथ लगे।
Jhansi Chirgaon Silver Coins Found मिट्टी खंगालने की मची होड़, लगा मेले जैसा नजारा
जैसे ही यह बात कस्बे के अन्य लोगों तक पहुँची, तालापुरा तालाब और खुदाई वाले स्थल पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग फावड़े, तसले और हाथों से ही मिट्टी की ढेरों को छानने लगे। कुछ ही देर में पूरा इलाका एक मेले के मैदान में तब्दील हो गया, जहाँ हर कोई अपनी किस्मत आजमाने और पुराने सिक्कों को ढूंढने की होड़ में जुटा नजर आया। स्थानीय लोगों के बीच यह कौतूहल का विषय बना हुआ है कि यह किसी प्राचीन काल का दबा हुआ खजाना हो सकता है।
Jhansi Chirgaon Silver Coins Found आधिकारिक पुष्टि और पुरातत्व विभाग की जांच का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, अभी तक प्रशासनिक स्तर पर सिक्कों की कुल संख्या, उनकी प्रामाणिकता या वे किस ऐतिहासिक काल (सत्र) के हैं, इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कानूनी नियम: नियमानुसार, यदि कहीं भी खुदाई के दौरान प्राचीन या पुरातात्विक महत्व की सामग्री मिलती है, तो वह सरकारी संपत्ति (Treasury) के दायरे में आती है। स्थानीय प्रशासन जल्द ही इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित पुरातत्व विभाग (Archaeological Department) को सूचित कर सकता है, ताकि सिक्कों की असलियत और ऐतिहासिक महत्व की वैज्ञानिक जांच कराई जा सके।





