Isa Ahmad
Illegal Murum Mining: खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में कथित अवैध मुरूम उत्खनन का मामला सामने आया है। पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता खिलेश वर्मा ने जिला खनिज अधिकारी (राजस्व) को शिकायत सौंपकर ग्राम पाण्डुका, मन्द्रकोही और नवागांव के सीमावर्ती क्षेत्र में बिना वैधानिक अनुमति मुरूम उत्खनन और परिवहन किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, 28 जून 2026 को स्थानीय सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर संबंधित स्थल का निरीक्षण किया गया। इस दौरान जेसीबी मशीनों से मुरूम का उत्खनन और हाइवा वाहनों के माध्यम से उसका परिवहन होते देखा गया। शिकायतकर्ता ने आवेदन में कुछ वाहनों के पंजीयन क्रमांक का भी उल्लेख किया है और दावा किया है कि मौके पर पहुंचने से पहले कई अन्य वाहन भी वहां से निकल चुके थे।
Illegal Murum Mining: पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने बिना अनुमति मुरूम उत्खनन और परिवहन का लगाया आरोप, दस्तावेजों के सत्यापन की मांग
Illegal Murum Mining: आवेदन में कहा गया है कि जानकारी लेने पर संबंधित कार्य एक निजी कंपनी द्वारा कराया जाना बताया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब खनन की अनुमति, रॉयल्टी, ट्रांजिट पास और अन्य आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों की मांग की गई, तब कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। हालांकि संबंधित पक्ष ने भूमि को अपनी निजी भूमि बताया।
Illegal Murum Mining: खनन नियमों के उल्लंघन का दावा, अवैध उत्खनन मिलने पर कार्रवाई और राजस्व हानि की वसूली की मांग
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुरूम एक गौण खनिज है और इसका उत्खनन केवल निजी भूमि होने के आधार पर नहीं किया जा सकता। शिकायतकर्ता ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार के खनन के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, निर्धारित रॉयल्टी का भुगतान और वैध ट्रांजिट पास अनिवार्य है।
Illegal Murum Mining: शिकायतकर्ता ने जिला खनिज विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने तथा यदि बिना अनुमति खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही अवैध उत्खनन में प्रयुक्त मशीनों और वाहनों पर कार्रवाई करने तथा शासन को हुई संभावित राजस्व हानि का आकलन कर उसकी वसूली सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
फिलहाल मामले में शिकायत जिला खनिज विभाग के समक्ष विचाराधीन है। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।





