India Bloc Save Democracy : नई दिल्ली, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने अपनी आगे की रणनीति का ऐलान किया है। बुधवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकालेंगे।

बैठक में चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची और EVM-VVPAT से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने चर्चा की। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और आयोग को लेकर ‘कठपुतली’ जैसी टिप्पणी की। ये आरोप कांग्रेस और विपक्षी दलों के राजनीतिक दावे हैं।
#WATCH | Delhi | After the INDIA alliance meeting, Congress President Mallikarjun Kharge says, "Five major rallies will be held in Oct-Nov, and the venues and dates will be finalised soon. A major rally will be organised in Delhi on November 1 because everyone now acknowledges… pic.twitter.com/kSDlw3JSos
— ANI (@ANI) September 30, 2026
India Bloc Save Democracy : SIR और वोटर लिस्ट पर विपक्ष की मांग
खड़गे ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग रखी। विपक्ष का कहना है कि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे सूचना देने और अपील का अवसर मिलना चाहिए।
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने SIR से पहले तैयार मतदाता सूची को भविष्य के चुनावों में आधार बनाने की मांग भी रखी है। इसके अलावा बूथ और विधानसभा स्तर पर मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की जानकारी सार्वजनिक करने की बात कही गई है।
बैठक में राहुल गांधी ने भी अपने विचार रखे..
#WATCH | Delhi | After INDIA alliance meeting, Congress MP & LoP, Lok Sabha, Rahul Gandhi says, "It is the personal commitment of all INDIA leaders that we are going to ensure that the people who have destroyed Indian democracy are punished. It doesn't matter how senior they are,… pic.twitter.com/UlUTggubmv
— ANI (@ANI) September 30, 2026
India Bloc Save Democracy : बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
बैठक में EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी उठाई गई। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया।
इससे पहले भी INDIA ब्लॉक के दल SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। 30 सितंबर की बैठक इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों की साझा रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी।
India Bloc Save Democracy : कौन-कौन से दल बैठक में शामिल हुए?
बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि, RJD, वाम दलों, NCP-SP, शिवसेना (UBT) और जम्मू-कश्मीर से जुड़े विपक्षी दलों समेत कई पार्टियों के नेता शामिल हुए।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में मौजूद नहीं रहे और उनकी जगह पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। वहीं AAP और DMK बैठक से अलग रहे। उद्धव ठाकरे के भी बैठक में वर्चुअल रूप से जुड़ने की जानकारी सामने आई थी।
India Bloc Save Democracy : चुनाव आयोग के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां पिछले कुछ दिनों में तेज हुई हैं। कांग्रेस ने 29 सितंबर को अपनी कार्यसमिति की बैठक में भी इन मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक में संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हुई।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा और संबंधित प्रक्रिया की जांच के लिए कदम उठाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी नियमों के अनुरूप बताया है।
India Bloc Save Democracy : संपादकीय नजरिया
चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर चर्चा की मांग करते हैं। मतदाता सूची में पारदर्शिता, नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया, SIR, EVM-VVPAT और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता जैसे मुद्दे सीधे मतदाता के भरोसे से जुड़े हैं। विपक्ष ने इन विषयों पर देशव्यापी मार्च का ऐलान किया है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, आरोपों और राजनीतिक दावों के साथ तथ्यों तथा प्रमाणों की सार्वजनिक जांच भी उतनी ही जरूरी है।
लोकतंत्र में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता केवल सत्ता पक्ष या विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक मतदाता के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए आयोग को उठाए गए सवालों पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए, जबकि राजनीतिक दलों को भी अपने दावों को प्रमाण और ठोस तथ्यों के साथ जनता के सामने रखना चाहिए। स्वस्थ लोकतंत्र में संस्थाओं पर सवाल उठना असामान्य नहीं है, लेकिन अंतिम कसौटी पारदर्शिता, संवैधानिक प्रक्रिया और मतदाता का विश्वास ही होना चाहिए।
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