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भारत और फ्रांसीसी कंपनी Safran मिलकर बनाएंगे 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का इंजन: राजनाथ सिंह ने किया खुलासा

BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली: भारत अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में इस विमान के इंजन निर्माण पर बड़ा अपडेट साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत इस इंजन को फ्रांसीसी कंपनी सफरान (Safran) के साथ मिलकर भारत में विकसित करेगा। यह कदम देश की रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2013-14 में देश का रक्षा निर्यात मात्र 686 करोड़ रुपये था, जो अब 2024-25 में बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी तरह, रक्षा बजट भी लगभग तीन गुना बढ़कर ₹6,21,940.85 करोड़ हो गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर नहीं है।

उन्होंने HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) के उदाहरण के माध्यम से स्वदेशी उत्पादन की सफलता का जिक्र किया। हाल ही में HAL को 97 तेजस फाइटर प्लेन बनाने का नया ऑर्डर 66,000 करोड़ रुपये की लागत से दिया गया है। इससे पहले 83 विमानों के निर्माण का ऑर्डर 48,000 करोड़ रुपये का था। राजनाथ सिंह ने कहा कि तेजस एयरक्राफ्ट भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का एक उदाहरण है, जिसने उद्योग और सेना के विश्वास के साथ इसे संभव बनाया।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए भी ठोस कदम उठा चुका है। इसके तहत विमान का इंजन भारत में ही विकसित किया जाएगा, और इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी Safran के साथ साझेदारी की गई है। यह कदम भारतीय रक्षा उद्योग में तकनीकी क्षमता बढ़ाने और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

इसके अलावा, भारत ने रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों जैसे बड़े रक्षा कार्यक्रमों में निजी कंपनियों को शामिल करने के अवसर प्रदान किए हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए DRDO के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह साझेदारी न केवल भारतीय कंपनियों को मजबूत बनाएगी, बल्कि वैश्विक रक्षा उद्योग में भारत की उपस्थिति को भी बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब केवल भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं है; दुनिया की प्रमुख रक्षा कंपनियों को भी भारत में निवेश और सह-उत्पादन के अवसर दिए जा रहे हैं।

इस घोषणा से स्पष्ट है कि भारत न केवल स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में अग्रसर है, बल्कि रक्षा उद्योग में वैश्विक साझेदारी और तकनीकी उत्कृष्टता को भी बढ़ावा दे रहा है। यह कदम भविष्य में भारतीय वायुसेना की क्षमता और देश की सामरिक सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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