संवाददाता: संजय सिंह सेंगर
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत जीराटोला से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी तालाब से अवैध रूप से मिट्टी युक्त मुरूम का खनन किया जा रहा है। इस मामले में ग्रामीणों ने सरपंच कांति मंडवी के प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह सारा कार्य प्रशासनिक अनुमति के बिना और मनरेगा योजना के नियमों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह तालाब मनरेगा योजना के अंतर्गत संरक्षित है और इसका इस प्रकार से दोहन न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि ग्राम पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
पंचायत सचिव और पूर्व सरपंच ने दी जानकारी
पंचायत सचिव ने स्पष्ट किया है कि तालाब से मुरूम खनन के लिए कोई प्रस्ताव पंचायत में प्रस्तुत या पारित नहीं हुआ है। वहीं, पूर्व सरपंच मेरावी ने भी इस कार्य को नियम विरुद्ध करार देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के खनन कार्य के लिए प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य होती है, जो इस मामले में पूरी तरह नजरअंदाज की गई है।
अवैध गतिविधियों के प्रमाण
स्थानीय लोगों द्वारा की गई शिकायत पर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खनन स्थल पर बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां कार्य में लगी हुई थीं। इसके अलावा एक जेसीबी मशीन (CG08 ZQ 9407) भी मौके पर पाई गई, जो बिना वैध दस्तावेजों के काम कर रही थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह खनन कार्य पूरी तरह अवैध तरीके से संचालित हो रहा था।
पर्यावरण और राजस्व को नुकसान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तालाब से मुरूम निकालने से उसकी जलधारण क्षमता प्रभावित होती है, जिससे भविष्य में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, इस प्रकार के अवैध खनन से राजस्व की भी हानि हो रही है, जो शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रामीणों की मांग: शीघ्र कार्रवाई हो
इस पूरे मामले से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार की मनमानी पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो अन्य पंचायतों में भी इसी तरह की गंभीर गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं, जिससे समूची पंचायत प्रणाली की साख पर बुरा असर पड़ेगा।
प्रशासन से अब उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।





