“अगर यूं ही रीलों में डूबे रहे, तो दिमाग नहीं, भविष्य डूब जाएगा” — असदुद्दीन ओवैसी का युवाओं को चेतावनी भरा संदेश

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BY: Yoganand Shrivastva

हैदराबाद,AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने युवाओं को इंटरनेट पर छाए रील कल्चर के प्रति आगाह करते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर रील्स और शॉर्ट वीडियो की लत केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि मानसिकता को भी बर्बाद कर रही है।

“रील देखने से सिर्फ दिमाग खराब होता है”

हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“अगर आप दिनभर रील्स ही देखते रहेंगे तो डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक कैसे बनेंगे? आप सिर्फ समय ही नहीं, दिमाग भी बर्बाद कर रहे हैं।”

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपना समय ज्ञान, शिक्षा और समाजिक जिम्मेदारियों को समझने में लगाएं।


रील की दुनिया छोड़ो, असली दुनिया समझो – BLO के सवालों का कैसे दोगे जवाब?

ओवैसी ने इस चेतावनी को बिहार में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) से भी जोड़ा। उनका कहना था कि अगर युवा रीलों में खोए रहेंगे तो जब मतदाता सूची की जांच के लिए BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) आएंगे, तब उन्हें जवाब देने के काबिल नहीं रहेंगे।

उन्होंने सवाल उठाया,

“बिहार में SIR के नाम पर क्या हो रहा है? कई भारतीय नागरिकों को नेपाली, बांग्लादेशी और म्यांमारी बताकर चिन्हित किया जा रहा है। अगर कोई BLO आपके पास आता है और आप रीलों में डूबे हैं, तो जवाब कैसे दोगे?”


ओवैसी ने चुनाव आयोग पर भी खड़े किए सवाल

ओवैसी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आयोग को किसी की नागरिकता तय करने का अधिकार किसने दिया?

उन्होंने आरोप लगाया कि,

“SIR असल में NRC को पिछले दरवाजे से लागू करने की साजिश है।”

उन्होंने 2003 में की गई जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की और पूछा कि उस समय कितने कथित विदेशी नागरिक मिले थे।


AIMIM की रणनीति – BLO से करेंगे सीधी बात

ओवैसी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी अब BLO से सीधा संवाद करेगी और उनसे पूछेगी कि वे किन बांग्लादेशी, म्यांमारी और नेपाली नागरिकों की बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,

“हम जानना चाहते हैं कि वो विदेशी नागरिक कहां हैं, जिनकी बात की जा रही है? सिर्फ नाम जोड़ने की राजनीति हो रही है।”


अब तक 86% फॉर्म जमा – अंतिम सर्वे शुरू

चुनाव आयोग के अनुसार, अब तक 86.32% फॉर्म इकट्ठे किए जा चुके हैं। जल्द ही घर-घर जाकर अंतिम सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी।

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