by: ajay nigam
Hindu Mahasabha : नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। अखिल भारत हिंदू महासभा (ऑल इंडिया हिंदू महासभा) ने संगठन के नाम का अनधिकृत प्रयोग करके सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका (डायरी संख्या 45071/2026) पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों से जुड़ी इस याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।
संगठन के उत्तर भारत प्रभारी श्री दिनेश कुमार ने कहा कि यह याचिका संगठन के अधिकार, सहमति या जानकारी के बिना ऐसे व्यक्ति ने दायर की है, जिसका संगठन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इसे फ़र्ज़ीवाड़ा बताया और कहा कि इसके ज़रिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह किया गया है।

Hindu Mahasabha : श्री दिनेश कुमार ने कहा कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने श्री राम जन्मभूमि की ऐतिहासिक लड़ाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ी। सर्वोच्च न्यायालय में वे सिविल अपील संख्या 2636/2011 में संगठन की ओर से प्रमुख पक्षकार (अपीलकर्ता) रहे। सुनवाई के दौरान और फ़ैसले के दिन वे स्वयं न्यायालय में उपस्थित रहे। सर्वोच्च न्यायालय के अभिलेखों में उन्हें निरंतर “अध्यक्ष, अखिल भारत हिंदू महासभा” के रूप में मान्यता मिली है, और ये सभी तथ्य माननीय न्यायालय को अवगत करा दिए गए हैं। संगठन में हर निर्णय उन्हीं के आदेश से होता है, और इस याचिका के लिए कोई अधिकार-पत्र या वकालतनामा जारी नहीं किया गया।
Hindu Mahasabha : श्री दिनेश कुमार ने कहा कि संगठन चढ़ावा चोरी का दृढ़ता से विरोध करता है, और इस पर उचित मंच पर पहले ही शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। लेकिन संगठन के नाम की आड़ में योगी सरकार और मोदी सरकार को बदनाम करने की साज़िश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संगठन ने इस साज़िश में पाँच व्यक्तियों को आरोपी बनाते हुए अपनी आपत्ति 13 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय और 14 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय में दर्ज कराई है। संगठन ने याचिका को अनुकरणीय व्यय सहित निरस्त करने की माँग की है। साथ ही पाँचों आरोपियों की भूमिका की जाँच कर उन पर ऐसी कठोर कार्रवाई की माँग की है, जो भविष्य के लिए सबक बने।
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