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CJI Statement : राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर CJI सूर्यकांत की टिप्पणी, बोले- न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता

CJI Statement on Rahul SC March

by: vijay yadav

CJI Statement : नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर आपत्ति जताई। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को कोई डरा-धमका नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालतें वास्तविक दुनिया से अलग नहीं हैं और उन्हें घटनाक्रम की जानकारी रहती है।

CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में विरोध प्रदर्शन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और प्रदर्शन स्थलों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

CJI Statement

CJI Statement : राहुल गांधी के मार्च पर अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को डराने-धमकाने का कोई प्रयास सफल नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतें वास्तविक दुनिया से कटी हुई नहीं हैं और उन्हें घटनाओं की जानकारी रहती है।

इस टिप्पणी के जरिए मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत मजबूती को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।

CJI Statement : CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश

CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित कानूनी एजेंसियों को CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत परिसर से जुड़े रिकॉर्ड को भी संरक्षित रखने पर जोर दिया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि निजी पक्षों के पास उपलब्ध प्रासंगिक सामग्री पुलिस को दी जा सकती है। इस निर्देश का उद्देश्य मामले से संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और जांच में उनकी उपयोगिता बनाए रखना है।

CJI Statement : तुषार मेहता बोले- सरकार ने माफी नहीं मांगी

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़े मामले में दाखिल जवाब को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अवमानना नोटिस के जवाब को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर यह खबर चल रही है कि सरकार ने बिना शर्त माफी मांग ली है, जबकि उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ है।

मेहता ने कहा कि अदालत में दाखिल जवाब के संदर्भ को समझे बिना उसे माफी के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। उन्होंने इस मामले में मीडिया रिपोर्टों के बीच सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की बात कही।

CJI Statement : जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी चर्चा हुई। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि प्रदर्शन स्थल के संबंध में एक समिति ने सुझाव दिया था।

अदालत ने संबंधित सरकार से जवाब मांगा और कहा कि पहले उसका पक्ष देखा जाएगा। पीठ ने संकेत दिया कि जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में मामले पर कानून के अनुसार आगे विचार किया जाएगा।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस सवाल की जांच की आवश्यकता जताई कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का निर्णय उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया था या नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों और पुलिस की निवारक कार्रवाई के कानूनी पहलुओं पर भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।

CJI Statement : महिला पत्रकार के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर बताया

सुनवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने वाले लोगों की पहचान करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों को गंभीर बताया और मामले की जांच जल्द पूरी करने की बात कही। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी महिला के साथ अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह पत्रकार हो या पुलिसकर्मी।

CJI Statement : न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रदर्शन के अधिकार पर नजर

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अदालत परिसर में राजनीतिक गतिविधियों, विरोध प्रदर्शन के अधिकार और प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर अदालत ने न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कोशिशों को लेकर स्पष्ट रुख रखा, वहीं दूसरी ओर डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और संबंधित मामलों की जांच में तेजी लाने पर जोर दिया। अब इन मामलों में सरकार और संबंधित एजेंसियों के जवाब तथा आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी।

नोट: ये खबर सोशल मीडिया पर वायरल खबरों पर आधारित है।

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