Report by: Ajay Nigam
HealthCon 2026: इंदौर स्थित Vaishnav University में शैल्बी अकादमी के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “HealthCon–2026” में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य, तकनीक, आयुष और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। “Hospital Management 4.0 : Integrating Technology, Humanity and Sustainability” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से 250 से अधिक शोधकर्ता, चिकित्सा विशेषज्ञ, शिक्षाविद और विद्यार्थी शामिल हुए।
HealthCon 2026: हेल्थकॉन–2026 में विशेषज्ञों ने रखे विचार
सम्मेलन की रूपरेखा संयोजक डॉ. उत्तम शर्मा ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञों, चिकित्सा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र के दौरान सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए.के. द्विवेदी मौजूद रहे, जो केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH) की एथिकल कमेटी के सदस्य और नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड होम्योपैथी (NEIAH), शिलॉन्ग की वैज्ञानिक सलाहकार समिति से जुड़े हैं।
HealthCon 2026: तकनीक और मानवता के संतुलन पर दिया जोर
डॉ. ए.के. द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं रह सकती। इसे मानवता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के साथ जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और डेटा आधारित सिस्टम स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहे हैं, लेकिन चिकित्सा व्यवस्था की आत्मा मानवीय संवेदनाएं ही हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को गति दे सकती है और ज्ञान दिशा दिखा सकता है, लेकिन चिकित्सा को पूर्णता मानवता से ही मिलती है।
HealthCon 2026: जल संरक्षण को बताया स्वास्थ्य का आधार
डॉ. द्विवेदी ने जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि मानव शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, जबकि मस्तिष्क, रक्त और हृदय में पानी की मात्रा लगभग 70 प्रतिशत तक रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि पानी सुरक्षित रहेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रह सकेगा। उनके अनुसार जल संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का भी विषय है।
HealthCon 2026: आयुष पद्धति को बताया होलिस्टिक हेल्थ की जरूरत
अपने वक्तव्य में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था में आयुष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, होम्योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धतियां व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं।
उन्होंने बताया कि दुनिया अब Preventive Healthcare की ओर बढ़ रही है और भारतीय चिकित्सा पद्धतियां लंबे समय से इसी सिद्धांत पर आधारित रही हैं। उनका कहना था कि बीमारी के इलाज से ज्यादा जरूरी बीमारियों की रोकथाम है।
HealthCon 2026: समन्वित चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि मधुमेह, थायरॉइड, कैंसर, सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी जटिल बीमारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों को एक मंच पर आना चाहिए।
उन्होंने शैल्बी अस्पताल द्वारा जोड़ प्रत्यारोपण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि अस्पताल में होम्योपैथिक ओपीडी भी शुरू की जानी चाहिए, ताकि ऑपरेशन के बाद मरीजों की रिकवरी बेहतर हो सके।
HealthCon 2026: महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता
महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए डॉ. द्विवेदी ने सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को ऐसी दिशा में काम करना चाहिए जिससे प्राकृतिक प्रसव की परंपरा मजबूत हो सके।
उनके अनुसार यदि समय रहते इस दिशा में प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां सामान्य प्रसव की प्रक्रिया से दूर होती जाएंगी।
HealthCon 2026: स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ रहे रोजगार के अवसर
इस अवसर पर शैल्बी समूह के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी डॉ. बाबू थॉमस ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और इसके चलते रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने कहा कि वैष्णव समूह समाज कल्याण और मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
HealthCon 2026: विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर
कुलगुरु प्रो. योगेशचंद्र गोस्वामी ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों और व्यावसायिक दक्षता का विकास करना है।
कार्यक्रम का समापन प्रतिकुलाधिपति कमलनारायण भुराड़िया के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, चिकित्सा विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।





