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Gwalior: मिंट स्टोन क्राफ्ट को मिला GI टैग, कारीगरों की बढ़ी मांग, आय और रोजगार को मिला नया संबल

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Gwalior: शहर की पारंपरिक मिंट स्टोन क्राफ्ट और पेपर मेशी आर्ट को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिलने के बाद स्थानीय कारीगरों के लिए खुशखबरी सामने आई है। इस मान्यता से न सिर्फ इन कलाओं की पहचान मजबूत हुई है, बल्कि कारीगरों की आय और रोजगार के नए रास्ते भी खुले हैं। जीआई टैग का असर महज एक महीने के भीतर दिखाई देने लगा है।

मिंट स्टोन से तैयार स्मृति चिह्न और कलाकृतियां पहले से ही देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखती थीं। अब जीआई टैग मिलने के बाद इनकी मांग में तेजी आई है। मिंट स्टोन अपनी मजबूती, टिकाऊपन और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। इससे जुड़े करीब 800 से अधिक कारीगर परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने लगा है।

प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने बताया कि ग्वालियर का स्टोन क्राफ्ट पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा चुका है। अब जीआई टैग मिलने से कलाकारों का उत्साह बढ़ा है और उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। उनके अनुसार, टैग मिलने के बाद मिंट स्टोन उत्पादों की मांग में अचानक उछाल आया है।

दीपक विश्वकर्मा को अकेले ही 100 से अधिक नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकार के बड़े कार्यक्रमों के लिए स्मृति चिह्न तैयार करने के ऑर्डर भी शामिल हैं। ये मोमेंटो देश-विदेश से आने वाले विशिष्ट अतिथियों और मंत्रियों को भेंट किए जाएंगे, जिन्हें स्थानीय कारीगर पारंपरिक हस्तकला से हाथों से तैयार कर रहे हैं।

जीआई टैग मिलने से ग्वालियर की मिंट स्टोन क्राफ्ट को नई पहचान मिली है और आने वाले समय में इससे पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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