Report: Santosh Saravgee
Gahoi Samaj Gwalior गहोई समाज द्वारा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष मुन्नालाल डोंगरे, नवयुवक मंडल अध्यक्ष कपिल बिलैया, पूर्व अध्यक्ष कैलाश सरावगी, पूर्व अध्यक्ष दिनेश पेपर, सीनियर कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष रामू गुप्ता सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने राष्ट्रकवि के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत उनकी कालजयी रचनाओं का स्मरण करते हुए उनके साहित्यिक अवदान को नमन किया।
Gahoi Samaj Gwalior राष्ट्र चेतना के प्रखर स्वर थे मैथिलीशरण गुप्त
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के उन महान कवियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया। उनका जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद के चिरगांव में हुआ था।

‘भारत-भारती’, ‘साकेत’, ‘यशोधरा’ और ‘पंचवटी’ जैसी उनकी रचनाएं आज भी हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। उनके साहित्यिक योगदान को देखते हुए महात्मा गांधी ने उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि प्रदान की थी। वर्ष 1954 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी अलंकृत किया।
Gahoi Samaj Gwalior नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है उनका साहित्य
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य केवल काव्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश है। उनकी रचनाएं आज भी युवाओं को राष्ट्रहित, समाजसेवा और नैतिक जीवन की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रकवि की जन्मतिथि 3 अगस्त को ‘कवि दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भी इस अवसर पर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, काव्य स्मरण और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और राष्ट्रकवि को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।



