नहीं रहे पूर्व विश्व शतरंज चैंपियन बोरिस स्पास्की, 88 वर्ष की उम्र में निधन

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
Former world chess champion Boris Spassky is no more, dies at the age of 88

मशहूर शतरंज ग्रैंडमास्टर बोरिस स्पास्की, जो 1969 में “आयरन” जीएम टिग्रान पेट्रोसियन को हराकर विश्व चैंपियन बने थे और 1972 में “मैच ऑफ द सेंचुरी” में बॉबी फिशर के हाथों अपना खिताब गंवा बैठे थे, का गुरुवार को 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि रूसी शतरंज महासंघ ने की।

एक बेबाक और स्वतंत्र विचारक खिलाड़ी

स्पास्की, जो अब तक के सबसे उम्रदराज जीवित विश्व शतरंज चैंपियन थे, अपने समय के सबसे बुद्धिमान और मजाकिया खिलाड़ियों में गिने जाते थे। वे सोवियत संघ की कम्युनिस्ट विचारधारा के आलोचक भी थे।

खिताब हारने के बाद भी उन्होंने कभी इसे अपने जीवन की सबसे दुखद घटना नहीं माना। उन्होंने कहा था,
“जब फिशर ने मुझसे खिताब छीना, तो मैं राहत महसूस कर रहा था। मैंने एक बड़ा बोझ उतार फेंका और खुलकर सांस ली।”

संघर्षों से भरा बचपन और शतरंज से जुड़ाव

बोरिस वासिलिविच स्पास्की का जन्म 30 जनवरी 1937 को लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था। लेकिन वे इस शहर को “पेट्रोग्राद” कहकर पुकारना पसंद करते थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, 1941 की गर्मियों में, जब जर्मन सेनाओं ने लेनिनग्राद को घेर लिया, तब बोरिस और उनके बड़े भाई जार्ज को वहां से निकालकर कीरोव ओब्लास्ट के एक अनाथालय में भेज दिया गया। कहा जाता है कि हजारों किलोमीटर लंबे सफर के दौरान उन्होंने शतरंज के नियम सीखे।

युद्ध के दौरान उनके माता-पिता भयंकर भूखमरी और संघर्षों से गुजरे। एक इंटरव्यू में स्पास्की ने बताया था कि उनके पिता लगभग भूख से मरने वाले थे, लेकिन उनकी मां ने अपनी संपत्ति बेचकर शराब की एक बोतल खरीदी, जिससे वे बच सके।

शतरंज की दुनिया में शुरुआती कदम

1946 में, जब वे 9 साल के थे, उनके भाई उन्हें क्रेस्टोवस्की आइलैंड के एक शतरंज पवेलियन में ले गए, जहां वे इस खेल के दीवाने हो गए।

10 साल की उम्र में ही उन्होंने सोवियत चैंपियन जीएम मिखाइल बोटविनिक के खिलाफ सिमुलटेनियस गेम में जीत हासिल की, जो एक साल बाद विश्व चैंपियन बने।

उन्होंने 1947 में अपना पेशेवर शतरंज करियर शुरू किया जब वे व्लादिमीर ग्रिगोरीविच ज़ाक के अधीन प्रशिक्षित हुए। युद्ध के बाद की गरीबी के दिनों में ज़ाक ने उन्हें खाना खिलाया और आर्थिक सहायता भी दी।

तेज सफलता और विश्व चैंपियन बनने का सफर

1952 में, 15 साल की उम्र में, स्पास्की ने अपना पहला बड़ा टूर्नामेंट खेला और लेनिनग्राद चैंपियनशिप में दूसरे स्थान पर रहे।

1955 में, 18 साल की उम्र में, उन्होंने सोवियत चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया, जहां उन्होंने बोटविनिक, पेट्रोसियन और अन्य दिग्गजों को कड़ी टक्कर दी।

उसी वर्ष, वे विश्व के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने।

1956 में हुए कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में उन्होंने भविष्य के विश्व चैंपियन वसीली स्मिस्लोव को हराया।

1969 में, उन्होंने टिग्रान पेट्रोसियन को हराकर विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीती और 10वें विश्व चैंपियन बने।

“मैच ऑफ द सेंचुरी” और फिशर से हार

1972 में, आइसलैंड की राजधानी रेकजाविक में, उन्होंने बॉबी फिशर के खिलाफ ऐतिहासिक “मैच ऑफ द सेंचुरी” खेला। यह मैच शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका था।

स्पास्की ने पहले दो गेम हारने के बावजूद, वापसी करने की कोशिश की, लेकिन अंततः 12.5 – 8.5 के स्कोर से हार गए और फिशर नए विश्व चैंपियन बन गए।

शतरंज से अलग एक विचारशील व्यक्तित्व

स्पास्की ने हार के बाद भी खुशी महसूस की। उनके अनुसार,
“विश्व चैंपियन बनने के बाद, मुझ पर बहुत सारी जिम्मेदारियां आ गई थीं। मैं खुद के लिए कुछ नहीं कर पा रहा था। फिशर से हारने के बाद, मैं आज़ाद महसूस करने लगा।”

1980 के दशक में वे फ्रांस चले गए और फ्रांसीसी नागरिकता भी ले ली। हालांकि, अपने अंतिम वर्षों में वे रूस लौट आए।

ELECTION 2026: ‘कोई ताकत कमल खिलने से नहीं…,’ पश्चिम बंगाल में दहाड़े सीएम डॉ. मोहन, कुछ ऐसा रहा माहौल

ELECTION 2026: भोपाल/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी

Bhopal : एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेंस को मिली रफ्तार, 1700 सेवाएं एक प्लेटफॉर्म पर: सीएम

Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'एमपी ई-सेवा पोर्टल' और इसके मोबाइल

Deputy Commissioner : जामताड़ा को मिला नया उपायुक्त, आलोक कुमार ने संभाला पदभार

Deputy Commissioner : जिले के 27वें उपायुक्त बने आलोक कुमार जामताड़ा/संवाददाता: रतन

Mandatory Protest : TET अनिवार्यता के विरोध में लामबंदी,शिक्षकों की ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’

Mandatory Protest : आंदोलन और कानूनी लड़ाई साथ-साथ ,पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता

Child Sexual Abuse: कोरिया में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म, आरोपी फरार

Child Sexual Abuse: पीड़िता का जिला अस्पताल में इलाज, हालत सामान्य Child

Buxar Job Camp : 21 अप्रैल को रोजगार मेला, 400 पदों पर भर्ती का मौका

बक्सर: जिले के युवाओं के लिए नौकरी पाने का शानदार अवसर सामने