Constitution Murder Day : भारत में 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के उस दौर की याद दिलाता है, जब संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहने का आग्रह किया।

Constitution Murder Day : लोकतंत्र के काले अध्याय की याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को घोषित आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक अंधकारमय अध्याय था। उन्होंने कहा कि उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल दिया गया था और नागरिकों की स्वतंत्रता पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए थे।प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “संविधान हत्या दिवस” हमें उस दौर की याद दिलाता है, जब लोकतंत्र को गंभीर चोट पहुंची थी। उन्होंने कहा कि यह दिन नागरिकों को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।
Constitution Murder Day : आपातकाल का विरोध करने वालों को श्रद्धांजलि
पीएम मोदी ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी नमन किया। उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं के निलंबन का विरोध किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संघर्ष किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों का योगदान देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।
Constitution Murder Day : राजनाथ सिंह ने भी किया आपातकाल का जिक्र
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का “काला अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया था और लाखों नागरिकों के अधिकार प्रभावित हुए थे।राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और संविधान की गरिमा बनाए रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
Constitution Murder Day : क्या था 1975 का आपातकाल?
भारत में आपातकाल की घोषणा 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने “आंतरिक अशांति” का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया था। यह अवधि 21 मार्च 1977 तक चली।आपातकाल लागू होने के पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जाते हैं। इनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह फैसला भी शामिल था, जिसमें इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को अमान्य घोषित किया गया था। इसके अलावा जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने भी राजनीतिक दबाव बढ़ाया था।
Constitution Murder Day : आपातकाल के दौरान क्या हुआ?
आपातकाल के दौरान देश में कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए। विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी सहित कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया था।अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत नागरिकों को प्राप्त कई अधिकार सीमित कर दिए गए थे। यही कारण है कि आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादास्पद दौरों में से एक माना जाता है।
Constitution Murder Day : भाजपा का कांग्रेस पर हमला
आपातकाल की वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सत्ता में बने रहने के लिए उस समय कांग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को कमजोर किया था।भाजपा का कहना है कि देश को उस दौर से सीख लेते हुए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहना चाहिए।
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