Rakhi Verma Executive Editor
Parliament Monsoon Session 2026 : संसद का मानसून सत्र बुधवार 13 अगस्त को हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच खत्म हो गया.. लोकसभा में वंदे मातरम् के बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. इधर राज्यसभा भी हंगामे के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई… सत्र के दौरान विपक्ष ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन में कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग की…हंगामे के बीच सरकार ने विधायी कामकाज जारी रखा…
Parliament Monsoon Session 2026 : सदन का बना मजाक, बिना चर्चा के बिल हुए पास
संसद ने इस सत्र में 12 विधेयक पारित किए, जिनमें सात सिर्फ 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित हुए… हंगामे के माहौल के बीच ही सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक सहित कई अहम बिल बिना चर्चा के पास करा लिए। सवाल इस बात का है कि बिना चर्चा कराये बिल पास कैसे किया जा सकता है | मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सिर्फ तकरार देखने को मिली और बिना मुद्दों पर चर्चा के सदन का सिर्फ मजाक बना | इसी पर करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
Parliament Monsoon Session 2026 : लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
संसद के मानसून सत्र के दौरान भारी हंगामे और गतिरोध के बीच दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना व्यापक चर्चा या बहस के ही ध्वनिमत से पारित कर दिए गए। जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक विवाद देखने को मिला।
Parliament Monsoon Session 2026 : मुख्य घटनाक्रम और आंकड़े
• सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए गए अधिकांश विधेयक बिना चर्चा के ही पास हो गए
• केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन)
• विधेयक जैसे अहम प्रस्ताव कुछ ही मिनटों में बिना चर्चा के पारित किए गए
• संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने
• और चर्चा से भागने का आरोप लगाया
• विपक्ष ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने और बिना बहस के जल्दबाजी में कानून पारित
• करने का आरोप लगाया
दरअसल सत्र की शुरुआत 20 जुलाई 2026 को हुई थी और समापन 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल स्थगन के साथ हुआ। विपक्षी दलों ने छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा और गृह मंत्री के जवाब की मांग की। गतिरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से काफी कम चल पाई।
हंगामे के माहौल के बीच ही सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक सहित कई अहम बिल बिना चर्चा के पास करा लिए। सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे सदन में रचनात्मक चर्चा से बच रहे हैं और केवल हंगामा कर रहे हैं। वहीं विपक्ष का कहना था कि महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
बहरहाल 18 दिनों में सिर्फ 15 घंटे ही चली लोकसभा चल पाई| वहीँ एंटी-पेपर लीक से ‘केरलम’ तक, बिना बहस के कई बड़े बिल पास हो गए | लोकसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी… लोकसभा की ओर से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद अब विधेयक की जांच और उसके प्रावधानों पर विचार संयुक्त संसदीय समिति के स्तर पर किया जाएगा. यह फैसला मानसून सत्र के दौरान हुए विधायी कामकाज की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल रहा.
उधर छात्र प्रदर्शन से लेकर कई मुद्दों पर टकराव बना ही रह गया और कोई चर्चा नहीं हो पाई | पूरे सत्र में संसद ने कम से कम 19 विधेयक पारित किए. इनमें सात विधेयक ऐसे रहे जिन्हें सिर्फ 36 मिनट में बिना चर्चा के पारित किया गया. यही आंकड़ा अब संसद की कार्यवाही और विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है और सोचने पर मजबूर कर रहा है कि कैसे माननीयों ने सदन का मजाक बनायाऔर बिना चर्चा के बिल पास कराया |



