Report By: Mahesh Nautiyal
Congress Targets CM Mohan : मध्य प्रदेश में सनातन को लेकर आज जो तस्वीर दिखाई दे रही है….उसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रशासक नहीं बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व के प्रतीक के रूप में नजर आ रहे हैं….मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ 2028 को दुनिया का सबसे भव्य और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन बनाने की तैयारी में जुटे हैं.
सिंहस्थ 2028 मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के लिए सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है…उनके लिए यह करोड़ों श्रद्धालुओं, लाखों संतों और देश-विदेश के पर्यटकों को जोड़ने वाला ऐसा मंच है…जो सरकार की प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक छवि दोनों को मजबूत कर सकता है…इसके लिए सीएम ने धार्मिक नगरों में शराबबंदी और सांस्कृतिक पहचान को लेकर कई कड़े फैसले भी लिए हैं..अभी हाल ही में सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक शराब माफिया पर कार्रवाई भी की…लेकिन मुख्यमंत्री की इन कोशिश से मध्य प्रदेश कांग्रेस घबरा गई है….और अब वो सनातन पर हमला करने और सीएम को बदनाम करने की साजिश करने लगी है….पढ़िए ये रिपोर्ट..

Congress Targets CM Mohan : प्रमुख बिंदु
- मुख्यमंत्री की लोकप्रियता से बौखलाई कांग्रेस
- सनातनद्रोह का कांग्रेस ने फिर पेश किया नमूना
- सिंहस्थ-2028 में खलल डालने का रचा दुष्चक्र
- क्या शराब माफिया के इशारे पर नाच रहा विपक्ष ?
- जमीन खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री पर अनर्गल आरोप
मध्यप्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा ..मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुआई में एक और कृषि,शिक्षा,स्वास्थ्य,सिंचाई,चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार हो रहा है,.देश-विदेश से निवेश लाकर प्रदेश को औद्योगिकीकरण की राह में आगे बढ़ाने की कोशिशें चल रहीं तो धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही …प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों के गरिमापूर्ण विकास और विस्तार..श्रीकृष्ण पाथेय के निर्माण,गौवंश के संरक्षण के साथ सरकार 2028 में उज्जैन में होने जा रहे सिंहस्थ के भव्य आयोजन की तैयारियों में जुटी है.

ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यमंत्री पर अनर्गल और आधारहीन आरोप लगाकर जनमानस में भ्रम फैलाने की कोशिश में जुटी है..जिस सिंहस्थ के आयोजन की तैयारियों में मुख्यमंत्री दिन-रात एक किए हैं उसी की आड़ लेकर उन पर ये आधारहीन आरोप लगाए जा रहे हैं,.जबकि असलियत ये है कि
Congress Targets CM Mohan : मुख्यमंत्री पर आरोप की सच्चाई
- मुख्यमंत्री की कृषि भूमि में कोई बढ़ोतरी नहीं
- नवंबर 2023 में कुल कृषि भूमि : 17.967 एकड़
- जून 2026 में भी कुल कृषि भूमि : 17.967 एकड़
- चुनावी हलफनामे में पहले से घोषित है संपत्ति
- मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव की भूमि लगभग यथावत
- सीमा यादव के नाम नवंबर 2023 में 12.287 एकड़ जमीन थी
- सीमा यादव के नाम जून 2026 में भी 12.292 एकड़ जमीन है
- मुख्यमंत्री के परिवार की अधिकांश जमीनें 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई
- सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड को लेकर भी विपक्ष के आरोप निराधार
- कंपनी की स्थापना 2008 में कृषि कार्यों के लिए हुई
- डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव 2017 में निदेशक पद छोड़ चुके थे
- मार्च 2026 में डॉ. मोहन यादव और सीमा यादव ने सभी शेयर भी त्याग दिए
- कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ जमीन थी
- जून 2026 में कंपनी की जमीन घटकर 65.69 एकड़ रह गई
- मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव ने सांवरखेड़ी में 16.38 एकड़ कृषि भूमि खरीदी
- वैभव यादव ने 2019 से मार्च 2023 के बीच जमीन की खरीदी की
- डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले उनके पुत्र के नाम जमीन खरीदी गई
- उज्जैन मास्टर प्लान-2035 लागू होने से पहले मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने जमीनें खरीदी
- मुख्यमंत्री की बहू शालिनी यादव ने व 2025 में गंगेड़ी गांव में लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि खरीदी
- शालिनी यादव के नाम की जमीन उज्जैन के मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर खरीदी गई
- शालिनी यादव के नाम की जमीन व्यावसायिक या विकसित क्षेत्र में नहीं आती है
- मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अपने व्यवसाय स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं
- रिश्तेदारों के निजी लेन-देन को मुख्यमंत्री से जोड़कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस राजनीतिक हताशा और निराशा में ये आरोप लगा रही..सामंती मानसिकता वाली कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के सामान्य परिवार से आने वाले डॉ.मोहन यादव को बदनाम कर अपनी अधिनायकवादी सोच का परिचय दे रही…
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए जा रहे आरोप बेहद हास्यास्पद भी नजर आते हैं..मुख्यमंत्री के परिवार पर उज्जैन के मास्टर प्लान का फायदा उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन इस मामले की सच्चाई भी कुछ और ही है.
- उज्जैन मास्टर प्लान-2035 पहले से लागू था
- उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मई 2023 से प्रभावी है
- डॉ. मोहन यादव 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बने हैं
साफ है कि मास्टर प्लान या विकास परियोजनाओं को मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रभावित करने का आरोप भी पूरी तरह निराधार है…ऐसे में सवाल वही है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर सनातनद्रोह का परिचय दे रही क्योंकि मुख्यमंत्री को अनर्गल आरोपों पर घेरने के लिए उसने महाकाल की नगरी उज्जैन और सिंहस्थ की आड़ ली है.. इस रिपोर्ट की टाइम लाइन की बात करें तो कुछ दिन पहले ही सरकार ने एक शराब माफिया पर कार्रवाई की थी….ठीक उसके बाद ही एक समाचार पत्र में ये रिपोर्ट प्रकाशित की गई है..
अब सबसे बड़ा सवाल है कि सुबह इंडियन एक्सप्रेस में समाचार छपता है और जिन कथित दस्तावेज के आधार पर समाचार बनाया गया….तीन घंटे में वो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के पास पहुंच जाते हैं…जिसके बाद कांग्रेस का गंदा खेल शुरू होता है और स्क्रिप्टेड प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की छवि को धूमिल करने की कोशिश होती है….इसके साथ ही एक सवाल और भी है…जब 2023 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था…तो उन्होंने अपने ऐविडेविट में अपनी पूरी संपत्ति का ब्योरा दिया था…इस रिपोर्ट में जिस संपत्ति की चर्चा हो रही है..वो लंबे समय से सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज है..
ऐसे में उस सार्वजनिक रिकॉर्ड को मिर्च मसाला लगाकर पेश करना सवाल खड़े करता है…इस रिपोर्ट की टाइमिंग साफ बताती है कि किसी खास एजेंडे के तहत मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है..इस सबसे से एक बात तो साफ होती है कि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ की तैयारी जोरों पर है….इन्ही ऐतिहासिक तैयारियों ने कांग्रेस को परेशान कर दिया है….
कांग्रेस को लगता है कि भव्य और अद्भुत होने वाला सिंहस्थ अगर कामयाब रहा तो आने वाले 2028 के चुनाव में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी को सत्ता में आने से रोकना मुश्किल होगा…और कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं पाएगी… रिपोर्ट की टाइमिंग देखकर विपक्ष पर एक आरोप और लग रहा कि वो शराब माफिया के इशारे पर नाच रहा है..क्योंकि ये आरोप उस समय सामने आए हैं जब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शराब माफिया पर शिकंजा कसा जा रहा है.

