,

दुर्ग: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निभाई परंपरा, सहा सोटा प्रहार

- Advertisement -
Ad imageAd image
Durg: Former Chief Minister Bhupesh Baghel followed the tradition and endured the blow of the stick.

रिपोर्ट- विष्णु गौतम, एडिट- विजय नंदन

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज दुर्ग जिले के कुम्हारी में आयोजित पारंपरिक गौरी-गौरा पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बघेल ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए पुरानी परंपरा का निर्वहन किया और सोटा प्रहार (छड़ी से मार) सहा।

सुख-समृद्धि के लिए सहा सोटा: प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने लोक आस्था से जुड़े इस पूजन कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। परंपरा के अनुसार लोक कल्याण और प्रदेश की मंगल कामना के लिए वे सोटा प्रहार सहन करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से क्षेत्र और प्रदेश में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अनिष्ट दूर होता है।

कुम्हारी में इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और समर्थक मौजूद रहे। भूपेश बघेल का सोटा प्रहार सहने का यह दृश्य उनकी पारंपरिक लोक आस्था को दर्शाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस परंपरा को निभाने का सिलसिला पिछले कई सालों से चला आ रहा है। वह हर साल दीपावली के दूसरे दिन, यानी गोवर्धन पूजा के अवसर पर, दुर्ग जिले के जंजगिरी (कुम्हारी के पास) गांव में आयोजित गौरी-गौरा पूजन कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं। यह परंपरा निभाने के लिए उन पर कुश (घास) से बने सोटे का प्रहार किया जाता है। यह प्रहार पारंपरिक रूप से पहले गांव के बुजुर्ग भरोसा ठाकुर करते थे और उनके निधन के बाद अब उनके पुत्र बीरेंद्र ठाकुर इस परंपरा को निभाते हैं।

इस परंपरा का महत्व (गौरी-गौरा पर्व के संदर्भ में)


‘सोटा प्रहार’ सहने की इस परंपरा के पीछे छत्तीसगढ़ की लोक मान्यताएं और गहरी आस्था जुड़ी हुई है अमंगल और विघ्नों का नाश, यह माना जाता है कि जो व्यक्ति स्वेच्छा से सोटे का प्रहार सहता है उसके जीवन और क्षेत्र के सभी विघ्न, संकट और अमंगल दूर हो जाते हैं। सुख-समृद्धि की कामना, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य लोग यह प्रहार प्रदेश की मंगल कामना, खुशहाली और सुख-समृद्धि की पूर्ति के लिए सहते हैं। यह लोक कल्याण की भावना का प्रतीक है। लोक आस्था और समर्पण: इस रस्म के माध्यम से नेता (जैसे भूपेश बघेल) अपनी लोक आस्था और छत्तीसगढ़ की मिट्टी तथा संस्कृति के प्रति गहरे अनुराग को प्रदर्शित करते हैं। बराबरी और लोक-संबंध: कुछ मान्यताओं के अनुसार, गौरा-गौरी के सामने सभी बराबर होते हैं, और सोटा प्रहार सहना एक प्रकार से बराबरी का संबंध भी दर्शाता है। यह लोक-उत्सव, गोवंश और मिट्टी के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।

यह सोटा प्रहार केवल एक रस्म नहीं, बल्कि लोक आस्था, मंगल कामना और विघ्नों को दूर करने की छत्तीसगढ़ की एक अनूठी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जैसे प्रमुख व्यक्ति सालों से निभाते आ रहे हैं।

Vaibhav Suryavanshi ने बल्ले से किया निराश, गेंद से मचाया तहलका, 4 गेंद में झटके 2 विकेट

Vaibhav Suryavanshi: दिलीप ट्रॉफी 2026 में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा।

Basuhara Water Crisis: शंभूगंज के बसुहारा गांव में पेयजल संकट गहराया, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

Basuhara Water Crisis जिले के शंभूगंज प्रखंड अंतर्गत झखरा पंचायत के बसुहारा

Anganwadi Supervisor Death: ट्रेन की चपेट में आने से आंगनबाड़ी सुपरवाइजर की मौत, निरीक्षण के लिए जा रही थीं केंद्र

रिपोर्टर : सुभम कुमार Anganwadi Supervisor Death फतुहा-इस्लामपुर रेलखंड पर डियांवा हॉल्ट

Trump के टैरिफ पर कनाडा का पलटवार, अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी;

Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका और

CG: Top 10

CG: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें 1. 15 घंटे तक टापू पर

MP: Top 10

MP: मध्य प्रदेश की 10 बड़ी खबरें 1. आधे एमपी में आज