धारी देवी मंदिर: उत्तराखंड की रक्षक देवी, जहां दिन में तीन बार बदलता है स्वरूप

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BY: Yoganand Shrivastva

उत्तराखंड: पवित्र धामों में से एक धारी देवी मंदिर आस्था और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर में माता धारी देवी की मूर्ति विराजमान है, जिन्हें उत्तराखंड की रक्षक देवी माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

धारी देवी मंदिर का इतिहास और मान्यता

धारी देवी मंदिर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि एक बार आई भयंकर बाढ़ में देवी की मूर्ति बहकर धारो गांव के पास एक चट्टान पर आकर रुक गई थी। इसके बाद वहां ईश्वरीय वाणी सुनाई दी, जिसमें मूर्ति को उसी स्थान पर स्थापित करने का निर्देश दिया गया। तब से यह स्थान भक्तों के लिए पूजनीय बन गया और यहां माता धारी देवी की पूजा की जाने लगी।

मंदिर की अनोखी विशेषता

धारी देवी मंदिर में देवी की प्रतिमा दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है

  • सुबह: देवी कन्या के रूप में दिखाई देती हैं।
  • दोपहर: माता युवती के रूप में विराजमान होती हैं।
  • शाम: देवी वृद्धा के रूप में दर्शन देती हैं।

यह अद्भुत परिवर्तन देखने के लिए भक्त पूरे दिन मंदिर परिसर में रहते हैं और माता के अलौकिक स्वरूप के दर्शन करते हैं।

2013 की बाढ़ और धारी देवी का क्रोध

स्थानीय लोगों का मानना है कि 16 जून 2013 को जब माता धारी देवी की मूर्ति को उसके मूल स्थान से हटाया गया, उसी दिन उत्तराखंड में भयानक बाढ़ आई। इस आपदा में हजारों लोग हताहत हुए। भक्तों का विश्वास है कि माता का विस्थापन ही इस आपदा का कारण बना, जिसे माता का क्रोध माना गया।

धारी देवी और कालीमठ मंदिर का संबंध

धारी देवी मंदिर और कालीमठ मंदिर का गहरा संबंध है।

  • धारी देवी मंदिर में माता काली के सिर की पूजा होती है।
  • कालीमठ मंदिर में देवी काली के धड़ की पूजा की जाती है।

कालीमठ मंदिर को तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जबकि धारी देवी मंदिर को चारधाम यात्रा की संरक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।

मंदिर के दर्शन का समय

  • सुबह: 6 बजे मंदिर के पट खुलते हैं।
  • शाम: 7 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं।

कैसे पहुंचें?

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून) है, जो मंदिर से 145 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो मंदिर से 115 किमी दूर स्थित है।
  • सड़क मार्ग: हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, कोटद्वार से बस व टैक्सी सेवा उपलब्ध है।

धारी देवी मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देवी शक्ति के चमत्कारों का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। नवरात्रि के दौरान यहां का माहौल भक्तिमय हो जाता है, जब हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

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