रिपोर्टर: सुधेश पांडेय
लोरमी विकासखंड के बिठलदा निवासी स्वर्गीय गोरेलाल सिंह राजपूत ने अपने जीवनकाल में ही मानवता की एक मिसाल कायम करते हुए अपने शरीर को मृत्यु उपरांत मेडिकल कॉलेज को दान करने का संकल्प लिया था। उनकी इस पुण्य कार्य भावना को उनके परिजनों ने पूर्ण सम्मान और विधिपूर्वक निभाते हुए जिला मेडिकल बोर्ड, सिम्स बिलासपुर में शरीर दान कर मानवता का एक बड़ा संदेश दिया है।
शरीर दान की अंतिम इच्छा पूरी
स्व. गोरेलाल सिंह ने अपने परिवारजनों को अपने जीवित रहते हुए स्पष्ट रूप से यह इच्छा जताई थी कि वे अपने शरीर को मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान करना चाहते हैं। जब उनकी मृत्यु हुई, तब उनकी बेटी और दामाद ने उनके संकल्प को सम्मान देते हुए उनकी अंतिम इच्छा पूरी की। उन्होंने आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर उनके शरीर को बिलासपुर स्थित जिला सिम्स अस्पताल के अधिकारियों को सौंप दिया।
मानवता और समाज के लिए प्रेरणा
यह कदम न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में योगदान है, बल्कि समाज में जीवन के प्रति दानशीलता और मानवता का संदेश भी फैलाता है। शरीर दान के माध्यम से मेडिकल छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है, जो भविष्य में मानव जीवन रक्षक साबित होता है।





