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Raisen आस्था का अटूट केंद्र: रायसेन का चमत्कारी ‘छींद धाम’, जहाँ अर्जी लगाने से दूर होते हैं सारे कष्ट

Raisen

Report: Ram Yadav

Raisen कलियुग के जाग्रत देवता भगवान श्री हनुमान के भारत में वैसे तो अनगिनत मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित छींद धाम की महिमा निराली है। भोपाल से करीब 130 किलोमीटर और जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर बरेली तहसील में स्थित यह धाम भक्तों के लिए साक्षात चमत्कार का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहाँ आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ वापस नहीं लौटता।

Raisen एक फीट से पांच फीट तक बढ़ी प्रतिमा: स्थापना का रोचक इतिहास

छींद धाम का धार्मिक इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है, लेकिन वर्तमान मंदिर का निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था। इसकी स्थापना स्वर्गीय धन्नुलाल जी रघुवंशी ने की थी। जनश्रुति और भक्तों के अनुभव बताते हैं कि स्थापना के समय हनुमान जी की प्रतिमा मात्र एक फीट की थी, जो समय के साथ अपने आप बढ़ती गई। आज बजरंगबली की यह दिव्य प्रतिमा लगभग पांच फीट ऊंची हो चुकी है। वर्तमान में रघुवंशी परिवार और पुजारी मिलकर मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन करते हैं।

Raisen पत्र के जरिए पहुँचती है अर्जी: दक्षिणमुखी हनुमान जी का सिद्ध दरबार

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की दक्षिणमुखी प्रतिमा है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत सिद्ध और फलदायी माना गया है। यहाँ हनुमान जी अपने आराध्य भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के ‘राम दरबार’ के सम्मुख विराजमान हैं।

आधुनिक समय में भी यहाँ एक अनूठी परंपरा जीवित है—भक्त अपनी मनोकामनाएं पत्र (संदेश) के माध्यम से हनुमान जी तक पहुँचाते हैं। यहाँ मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से 5 या 11 मंगलवार/शनिवार को सुबह 4 बजे या शाम 8 बजे की आरती में शामिल होता है, तो उसकी झोली खुशियों से भर जाती है।

Raisen असाध्य रोगों से मुक्ति और रपट की परंपरा

छींद धाम केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के लिए भी प्रसिद्ध है। भक्तों का मानना है कि यहाँ दर्शन मात्र से कई ऐसी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं जिनका इलाज चिकित्सा विज्ञान में कठिन है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु मुख्य रूप से:

  • संतान प्राप्ति
  • यश और कीर्ति
  • धन-धान्य और व्यापार में उन्नति
  • गंभीर रोगों से मुक्ति

Raisen के लिए मन्नत मांगते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु यहाँ भंडारा आयोजित करते हैं। यहाँ भगवान को गुड़-चना, नारियल और विशेष मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। हर मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है, जो हनुमान जी के जयकारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर देता है।

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