BY: Yoganand Shrivastva
Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बसे हाटी समुदाय में सदियों से ‘जोड़ीदार प्रथा’ (बहुपति प्रथा) की परंपरा चली आ रही है, जिसे आम बोलचाल में ‘द्रौपदी प्रथा’ भी कहा जाता है। इस अनूठी परंपरा के तहत घर की एक ही बहू परिवार के सभी सगे भाइयों की सांझी पत्नी होती है। आधुनिक युग में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन इस समुदाय के लिए यह केवल एक प्रथा नहीं बल्कि जीवन जीने का व्यावहारिक तरीका है।
जमीन के बंटवारे को रोकने और सुरक्षा का मजबूत जरिया
Himachal Pradesh इस प्रथा के पीछे दो मुख्य सामाजिक और आर्थिक कारण हैं:
- भूमि का संरक्षण: पहाड़ों में कृषि योग्य जमीन बहुत कम है। अगर हर भाई अलग विवाह करेगा, तो उपजाऊ भूमि छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटकर खत्म हो जाएगी। संयुक्त विवाह से परिवार और जमीन दोनों सुरक्षित रहते हैं।
- महिला सुरक्षा: पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों के कारण पुरुषों की असमय मृत्यु का जोखिम रहता है। इस प्रथा में यदि एक भाई की मृत्यु हो जाए, तो दूसरा भाई पत्नी को संभालता है, जिससे महिला को कभी विधवा जीवन का सामना नहीं करना पड़ता।
- कानूनी व व्यावहारिक तालमेल: सरकारी दस्तावेजों में बच्चे और पत्नी किसी एक भाई के नाम दर्ज होते हैं, जबकि व्यावहारिक रूप से पूरा परिवार एक छत के नीचे सामंजस्य के साथ रहता है।
बदलता वक्त और नई पीढ़ी की सोच
Himachal Pradesh समय के साथ अब हाटी समुदाय में भी बदलाव आने लगा है। आधुनिक शिक्षा और शहरों की ओर पलायन के चलते अब यह प्रथा मुख्य रूप से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों तक ही सीमित रह गई है। आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति का सम्मान तो करती है, लेकिन नई पीढ़ी की लड़कियां अब अपनी पसंद और व्यक्तिगत आजादी को प्राथमिकता देने लगी हैं। बिना किसी जबरदस्ती के यह परंपरा अब धीरे-धीरे स्वतः समाप्त होने की राह पर है।
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