Chandrayaan-4 : साउथ पोल पर मॉन्स माउटन में होगी लैंडिंग

- Advertisement -
Swadesh NewsAd image
Chandrayaan-4

Chandrayaan-4 : बेंगलुरु, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 मिशन के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक संभावित लैंडिंग क्षेत्र की पहचान कर ली है। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से प्राप्त हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों के अध्ययन के बाद मॉन्स माउटन (MM-4) क्षेत्र को लैंडिंग के लिहाज से सबसे उपयुक्त माना है।

मॉन्स माउटन चंद्रमा के साउथ पोल के पास स्थित करीब 6 किलोमीटर ऊंचा पर्वतीय क्षेत्र है। इसकी ऊपरी सतह अपेक्षाकृत समतल पाई गई है, जिससे सुरक्षित लैंडिंग की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इसरो ने स्पष्ट किया है कि लैंडिंग साइट पर अंतिम निर्णय मिशन लॉन्च की तारीख के आसपास लिया जाएगा।

Chandrayaan-4 : सूर्य की रोशनी और वॉटर आइस की संभावना

वैज्ञानिकों के अनुसार मॉन्स माउटन क्षेत्र की अहमियत सिर्फ उसकी भौगोलिक बनावट तक सीमित नहीं है। यहां लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश मिलने की संभावना है, जो लैंडर और अन्य उपकरणों की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम है। इसके अलावा इस इलाके में जल-बर्फ (वॉटर आइस) की मौजूदगी की संभावना भी जताई जा रही है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Chandrayaan-4

Chandrayaan-4 : चंद्रयान-2 की तस्वीरों से मिला आधार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अध्ययन को लूनर एंड प्लैनेटरी साइंस कॉन्फ्रेंस (LPSC-2026) में प्रस्तुत किया गया। लैंडिंग साइट के चयन में चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पर लगे ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (OHRC) की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। यह कैमरा चंद्र सतह की बेहद बारीक जानकारी देता है, जिससे छोटे क्रेटर, पत्थर, ढलान और संभावित खतरों की पहचान पहले ही हो जाती है।

Chandrayaan-4 : MM-4 साइट क्यों सबसे सुरक्षित?

स्टडी में मॉन्स माउटन क्षेत्र की चार अलग-अलग संभावित साइट्स का विश्लेषण किया गया, जिनमें MM-4 को सबसे सुरक्षित पाया गया।

इस क्षेत्र में औसतन ढलान लगभग 5 डिग्री है, जबकि लैंडर 10 डिग्री तक के ढलान पर उतरने में सक्षम है।
बड़े बोल्डर कम हैं और अधिकांश पत्थरों का आकार 0.3 मीटर से छोटा है।
यहां करीब 11 से 12 दिन तक लगातार सूर्य प्रकाश मिलने की संभावना है।
पृथ्वी के साथ रेडियो संपर्क भी अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है।

Chandrayaan-4

Chandrayaan-4 : चंद्रमा से सैंपल लेकर लौटेगा चंद्रयान-4

करीब 2104 करोड़ रुपए की लागत वाले इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। यह इसरो का अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन माना जा रहा है।

Chandrayaan-4 : मिशन में दो अलग-अलग प्रक्षेपण यान का उपयोग किया जाएगा।
LVM-3 (हैवी-लिफ्टर) और
PSLV, जिन्हें अलग-अलग पेलोड के साथ लॉन्च किया जाएगा।

Chandrayaan-4 : पहले स्टैक में चंद्र सतह पर उतरने वाला डिसेंडर मॉड्यूल और नमूने इकट्ठा कर ऊपर भेजने वाला एसेंडर मॉड्यूल शामिल होगा। दूसरे स्टैक में प्रोपल्शन मॉड्यूल, सैंपल ट्रांसफर मॉड्यूल और पृथ्वी पर वापसी के लिए री-एंट्री मॉड्यूल रखा जाएगा। इसरो के वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रयान-4 मिशन भारत को चंद्र अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ले जाने की क्षमता रखता है।

Haridwar Cleanliness Drive: सोमवती अमावस्या स्नान पर्व के बाद हरिद्वार में चला स्वच्छता महाअभियान

Haridwar Cleanliness Drive: सोमवती अमावस्या स्नान पर्व के समापन के बाद हरिद्वार

Chandeni School Infrastructure: जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, चंदेनी स्कूल का अधूरा निर्माण बना चिंता का विषय

Chandeni School Infrastructure: खैरागढ़ जिले के ग्राम चंदेनी स्थित शासकीय प्राथमिक शाला

CG TOP 10: छत्तीसगढ़ प्रदेश की 10 बड़ी खबरें

1. CG TOP 10: तिल्दा में छात्र की चाकू मारकर हत्या CG