BY: Yoganand Shrivastva
Captain Smit Machchhar प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने फ्लाईदुबई विमान में संकट के समय साहस और सूझबूझ दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित के साहस ने एक बड़ी विमान दुर्घटना को टालने में भूमिका निभाई और इजरायल के प्रधानमंत्री ने इसे 9/11 जैसी घटना को टालने से जोड़ा है।
विमान में संकट के बीच कैप्टन स्मित ने दिखाई हिम्मत
Captain Smit Machchhar दी गई जानकारी के अनुसार, दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी, जब सह-पायलट पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का आरोप लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर धारदार हथियार से हमला किया, लेकिन उन्होंने उसका सामना करते हुए विमान को बचाने की कोशिश जारी रखी।
Captain Smit Machchhar इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने सह-पायलट को काबू किया। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। घटना के दौरान विमान में 174 लोग सवार थे।
पीएम मोदी ने परिवार से की बातचीत
Captain Smit Machchhar यूपीएससी शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित के साहस का उल्लेख करते हुए उनके परिवार के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया। पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने स्मित के पिता भूपेंद्र, माता गीता और पत्नी सोनल से बातचीत की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कैप्टन स्मित का पराक्रम हर देशवासी के लिए गर्व की बात है और उन्होंने देशवासियों से उनके दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने की अपील की।
यूपीएससी के 100 साल पूरे होने पर पीएम का संदेश
Captain Smit Machchhar समारोह में प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की 100 वर्षों की यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान पीढ़ियां, तकनीक, पाठ्यक्रम और सरकारें बदलीं, लेकिन संस्था पर लोगों का भरोसा कायम रहा। यूपीएससी के शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 Landmark Judgements’ नामक पुस्तक जारी की गई।
प्रधानमंत्री ने सिविल सेवाओं में ऐसे युवाओं को लाने पर जोर दिया जो पद के बजाय जनसेवा से प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेजी से बदलती तकनीक के दौर में प्रशासनिक व्यवस्था को भी नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार होना होगा। यूपीएससी की शताब्दी वर्ष की शुरुआत 1 अक्टूबर 1926 को गठित सार्वजनिक सेवा आयोग की ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी है।
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