Haryana Revenue System: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य की राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार टैक्स की दरों में बढ़ोतरी के बजाय कर आधार का विस्तार करने पर जोर देगी। उन्होंने कहा कि बेहतर टैक्स अनुपालन, राजस्व हानि पर रोक और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए राज्य की वित्तीय क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ईमानदारी से टैक्स देने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि अधिक लोगों को कर व्यवस्था के दायरे में लाकर राजस्व आधार को मजबूत करना है।
Haryana Revenue System: विकसित हरियाणा 2047 को लेकर राष्ट्रीय सम्मेलन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को ‘विकसित हरियाणा 2047’ के लिए ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण और मजबूती को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।
स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) की ओर से आयोजित सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़, SJHIFM के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और सलाहकार एनके बिश्नोई समेत नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत राजस्व व्यवस्था का उद्देश्य केवल सरकार के खजाने में अधिक पैसा जुटाना नहीं है। इसका अंतिम लक्ष्य बेहतर सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराकर आम लोगों के जीवन में सुधार लाना है।
Haryana Revenue System: अप्रैल से अगस्त तक SGST कलेक्शन 29% बढ़ा
मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर यानी SGST संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में SGST संग्रह 19,174 करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में भी हरियाणा के SGST संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इस दौरान राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।
मुख्यमंत्री के अनुसार देश के कुल GST करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है, लेकिन देश के कुल GST संग्रह में राज्य का योगदान करीब 7.7 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि अब इस वृद्धि को स्थायी राजस्व क्षमता में बदलने की जरूरत है।
Haryana Revenue System: कृषि से उद्योग और सर्विस सेक्टर की ओर बढ़ा हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा अब कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, IT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस सर्विसेज का विस्तार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, IMT खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार और अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही हैं।
इसके साथ ही पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला का वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार का स्टील उद्योग, यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग और रोहतक का नट-बोल्ट एवं ऑटो-कंपोनेंट उद्योग जैसे पारंपरिक MSME क्लस्टर भी हरियाणा की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नया उद्योग, निवेश और उद्यम रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ राज्य के लिए नए राजस्व आधार की संभावनाएं भी तैयार करता है।
Haryana Revenue System: 2030 तक 10% और 2047 तक 15% का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता की तुलना में हरियाणा का अपना कर राजस्व फिलहाल GSDP के 7 प्रतिशत से कम है। इसे 2030 तक 10 प्रतिशत और 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य टैक्स की दरें बढ़ाकर हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा राजस्व व्यवस्था की दक्षता, कवरेज और उत्पादकता बढ़ाने के साथ कर आधार के विस्तार, बेहतर अनुपालन और राजस्व हानि को रोकने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मूल मंत्र है कि दर नहीं, आधार बढ़ाना है और बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के प्रति बाहरी निवेशकों का विश्वास बढ़ा है और विकसित हरियाणा से विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
Haryana Revenue System: पुराने टैक्स विवादों के समाधान के लिए नई योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम, 2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की योजना का लाभ करीब 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने उठाया था। व्यापारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है।
इसके अलावा ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के जरिए पंजीकरण और इंतकाल की प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का काम किया जा रहा है।
Haryana Revenue System: AI और डेटा एनालिसिस से मजबूत होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की राजस्व व्यवस्था डेटा आधारित और आधुनिक तकनीक से सक्षम होनी चाहिए। GST, पंजीकरण, परिवहन, बिजली, शहरी विकास और अन्य सरकारी प्रणालियों के आंकड़ों को आपस में जोड़कर आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर तैयार की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे राजस्व की संभावनाओं और व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, उन्नत डेटा एनालिसिस और एकीकृत डेटाबेस के जरिए जोखिम की पहचान, राजस्व हानि रोकने और नियमों के अनुपालन में सुधार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने साथ ही कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल ईमानदार करदाताओं को बेहतर और आसान सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी किया जाना चाहिए।
Haryana Revenue System: करदाता को केंद्र में रखकर बने कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों से अगले एक-दो वर्षों के तत्काल उपायों, मध्यम अवधि के सुधारों, भविष्य की तकनीक एवं डेटा प्रणालियों और जरूरी संस्थागत बदलावों को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पूरी कार्ययोजना के केंद्र में करदाता होना चाहिए। सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल हो, नागरिकों का समय बचे, उनकी अनिश्चितता कम हो और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी से टैक्स देने वाले नागरिक को सम्मान मिलना चाहिए, जबकि नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
Haryana Revenue System: सम्मेलन से ठोस सुधारों की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा की राजस्व व्यवस्था को अधिक मजबूत, आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदमों का आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य के संसाधनों को मजबूत और विस्तारित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य को संसाधन मुख्य रूप से भारत सरकार से मिलने वाले अनुदान एवं सहयोग, ऋण और अपने स्वयं के राजस्व के माध्यम से प्राप्त होते हैं। ऐसे में यह सम्मेलन राज्य के अपने राजस्व को बढ़ाने, संग्रहण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और नीतिगत स्तर पर आवश्यक बदलाव करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में मिले विशेषज्ञ सुझावों और मार्गदर्शन को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि हरियाणा के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने के साथ राज्य की आर्थिक व्यवस्था को भी अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।


