MP Police Law and Order: मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पुलिस व्यवस्था में तकनीकी आधुनिकीकरण, त्वरित रिस्पॉन्स, जवाबदेही और जनसंवाद पर जोर दिया जा रहा है। पुलिसिंग को केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय अपराध की रोकथाम, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और नागरिकों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर भी फोकस किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश पुलिस के अनुसार, पारंपरिक पुलिसिंग के साथ आधुनिक तकनीक को जोड़कर स्मार्ट और जन-संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में कई पहल की गई हैं। सीसीटीवी नेटवर्क, डिजिटल पुलिस सेवाएं, साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था, डाटा आधारित पुलिसिंग और आपातकालीन रिस्पॉन्स सिस्टम इसके प्रमुख हिस्से हैं। राज्य पुलिस की डिजिटल पहलों में e-Rakshak, e-FIR, e-Vivechana और CCTNS जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
MP Police Law and Order: डिजिटल माध्यम से नागरिकों को पुलिस सेवाएं
नागरिकों को पुलिस से जुड़ी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार किया गया है। चरित्र सत्यापन, किरायेदार और घरेलू सहायक सत्यापन, ऑनलाइन शिकायत तथा अन्य नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मध्यप्रदेश पुलिस के जिला पोर्टल पर भी शिकायत, गुम वस्तु की रिपोर्ट, सूचना देने और विभिन्न प्रकार के सत्यापन जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
पुलिस की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को थाने तक जाने की जरूरत कम करना और शिकायतों को सीधे संबंधित पुलिस व्यवस्था तक पहुंचाना है।
MP Police Law and Order: e-Rakshak ऐप से स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा
मध्यप्रदेश के स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा विकसित e-Rakshak ऐप को स्मार्ट पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऐप में FIR सर्च, आरोपी की जानकारी, हिस्ट्रीशीटर रिकॉर्ड, वाहन संबंधी जानकारी, गुमशुदा व्यक्ति, फेस रिकग्निशन और समन-वारंट से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध हैं।
SCRB के अनुसार e-Rakshak ऐप को 30 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं ने डाउनलोड किया है और इसे NCRB की ओर से मध्यप्रदेश की पुलिसिंग की एक Best Practice के रूप में मान्यता भी मिली है।
MP Police Law and Order: Dial-112 और त्वरित रिस्पॉन्स पर फोकस
आपात स्थिति में नागरिकों को तेजी से पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए Dial-112 व्यवस्था को मजबूत किया गया है। मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक Dial-112 पोर्टल के अनुसार सेवा सभी 55 जिलों में संचालित है और आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर उपलब्ध है।
Dial-112 व्यवस्था को GPS और First Response Vehicle नेटवर्क के साथ जोड़ा गया है। दुर्घटना, आपात स्थिति, गुमशुदगी और अन्य मामलों में त्वरित सहायता पहुंचाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
MP Police Law and Order: e-FIR और ऑनलाइन शिकायत से नागरिकों को सुविधा
संपत्ति चोरी और नुकसान से जुड़े मामलों में ऑनलाइन रिपोर्टिंग की सुविधा को विस्तार दिया गया है। दिए गए विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, e-FIR की व्यवस्था से नागरिकों को कई मामलों में डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिली है।
जुलाई से दिसंबर 2024 के दौरान मध्यप्रदेश में 6,577 e-FIR दर्ज होने का आंकड़ा दिया गया है। इसी अवधि में प्राप्त 5,73,776 सम्मनों में से लगभग 3.40 लाख सम्मनों की ऑनलाइन तामील WhatsApp और e-Rakshak के माध्यम से किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
MP Police Law and Order: CCTV नेटवर्क से निगरानी मजबूत
प्रदेश में सार्वजनिक सुरक्षा और अपराध की जांच में CCTV नेटवर्क का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 12,437 CCTV कैमरे लगाए गए हैं और उनकी 24×7 निगरानी की जाती है। वर्ष 2025 में 11,903 मामलों में CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया गया, जबकि 1,628 मामलों में जांच या कानून-व्यवस्था से संबंधित सफलता मिली।
इस व्यवस्था का उपयोग अपराध की जांच के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और कानून व्यवस्था बनाए रखने में भी किया जा रहा है।
MP Police Law and Order: साइबर अपराध पर 1930 और साइबर हेल्प डेस्क
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर अपराध की चुनौती भी बढ़ी है। इसके मद्देनजर साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में जल्द शिकायत दर्ज कराने और रकम को रोकने के प्रयास किए जाते हैं।
भोपाल के 37 थानों में साइबर हेल्प डेस्क और तकनीकी सेल स्थापित किए जाने तथा 779 पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई है। साइबर पेट्रोलिंग के जरिए ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने पर भी जोर है।
जनवरी 2026 में फर्जी ट्रेडिंग ऐप, डिजिटल अरेस्ट, Telegram Task Fraud और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी जैसे मामलों के खिलाफ कार्रवाई की गई। बुरहानपुर में साइबर सेल द्वारा 8.70 लाख रुपये की ठगी की राशि होल्ड कराकर पीड़ित को वापस कराए जाने की जानकारी भी दी गई है।
MP Police Law and Order: नशे के खिलाफ अभियान और Operation Prahar
मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई और जागरूकता दोनों स्तरों पर अभियान चलाने की बात कही है। ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के जरिए युवाओं और आम लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
नारकोटिक्स से जुड़ी गुप्त सूचनाओं के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराया गया है। वहीं ‘Operation Prahar’ के तहत दुर्गम और नेटवर्क से बाहर के क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस के जरिए अवैध फसलों और मादक पदार्थों की गतिविधियों पर निगरानी की जा रही है।
MP Police Law and Order: माइक्रो बीट और कॉम्बिंग गश्त
जमीनी स्तर पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के लिए माइक्रो बीट व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बीट को छोटे-छोटे वार्ड और मोहल्लों में विभाजित कर आरक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर पर स्थानीय नागरिकों से संपर्क तथा लोकल इंटेलिजेंस जुटाने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा रात के समय वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में कॉम्बिंग गश्त की जाती है। इस दौरान स्थायी वारंटियों, फरार आरोपियों, निगरानी बदमाशों और असामाजिक तत्वों की जांच की जाती है।
MP Police Law and Order: त्योहारों से पहले शांति समिति और जनसंवाद
संवेदनशील त्योहारों, जुलूसों और राष्ट्रीय पर्वों से पहले शांति समिति की बैठकें आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है। इनमें विभिन्न समुदायों, धर्मगुरुओं, आयोजकों और गणमान्य नागरिकों की भागीदारी के जरिए सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
इसके साथ ही जिला और थाना स्तर पर जनसुनवाई के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के समाधान पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस और जनता के बीच भरोसा मजबूत करना कानून व्यवस्था की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
MP Police Law and Order: महिला और बाल सुरक्षा पर विशेष फोकस
महिलाओं, बालिकाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नेटवर्क को सक्रिय रखा गया है। महिला हेल्पलाइन 1090 और 181 के माध्यम से संकटग्रस्त महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से संकट में फंसे या गुमशुदा बच्चों की मदद और रेस्क्यू की व्यवस्था की जाती है।
MP Police Law and Order: नए आपराधिक कानूनों के लिए पुलिस को प्रशिक्षण
BNS, BNSS और BSA लागू होने के बाद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है। दिए गए विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2025 तक 87 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका था।
घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए e-Sakshya जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जांच प्रक्रिया में डिजिटल साक्ष्य को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलती है।
MP Police Law and Order: CCTNS से अपराध डेटा का डिजिटलीकरण
अपराध और अपराधियों से संबंधित जानकारी को एकीकृत करने के लिए CCTNS व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश SCRB के अनुसार CCTNS के तहत 1,111 पुलिस स्टेशनों को जोड़ा गया है, जिससे अपराध संबंधी जानकारी के प्रबंधन और रियल टाइम डेटा शेयरिंग में सहायता मिलती है।
दिए गए विभागीय आंकड़ों के अनुसार CCTNS के दूसरे चरण के लिए 177.88 करोड़ रुपये की स्वीकृति और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 84.94 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का उल्लेख है।
MP Police Law and Order: 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन से वैज्ञानिक जांच
नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक साक्ष्य के महत्व को देखते हुए घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इसके लिए 57 Mobile Forensic Vans यानी MFVs की तैनाती का उल्लेख किया गया है।
इसका उद्देश्य घटनास्थल से साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करना और जांच प्रक्रिया में तकनीकी एवं फॉरेंसिक संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाना है।
MP Police Law and Order: पुलिसकर्मियों को CPR और तनाव प्रबंधन प्रशिक्षण
पुलिसकर्मियों को केवल कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। CPR प्रशिक्षण के जरिए सड़क दुर्घटना या कार्डियक इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में प्राथमिक सहायता देने की क्षमता विकसित करने पर जोर है।
पुलिसकर्मियों के मानसिक तनाव और वेलफेयर के लिए Heartfulness संस्था के साथ एमओयू के जरिए तनाव प्रबंधन और ध्यान से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।
MP Police Law and Order: पुलिस भर्ती अभियान को गति
पुलिस बल की संख्या और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भर्ती अभियान जारी हैं। दिए गए विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में लगभग 8,500 पदों और वर्ष 2026 में 9,662 विभिन्न पदों पर भर्ती का उल्लेख है।
गृह विभाग के अनुसार इंस्पेक्टर से लेकर जवान स्तर तक 18 हजार पदों पर भर्ती की जा रही है और कुल 85 हजार नए पदों पर भर्ती अभियान चलाने की जानकारी दी गई है।
MP Police Law and Order: अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण
वर्दीधारी सेवाओं में युवाओं को अवसर देने के लिए अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। जेल प्रहरी और वन रक्षक के पदों पर भी अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का उल्लेख है।
इसके अलावा आरक्षक सामान्य ड्यूटी और विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत तथा भूतपूर्व सैनिकों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। जेल प्रहरी के पदों पर होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत और भूतपूर्व सैनिकों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की जानकारी दी गई है।
MP Police Law and Order: Dial-100 से Dial-112 तक इमरजेंसी सिस्टम का विस्तार
Dial-100 को भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप इमरजेंसी नंबर 112 से इंटीग्रेट किया गया है। दूसरे चरण के लिए 1,565 करोड़ रुपये की कार्ययोजना और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 348.16 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का उल्लेख किया गया है।
मध्यप्रदेश पुलिस का मौजूदा Dial-112 सिस्टम सभी 55 जिलों में आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित है।
MP Police Law and Order: आंतरिक सुरक्षा और विशेष बलों को मजबूती
आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 136.30 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके तहत विशेष शाखा प्रशिक्षण संस्थान, ATS और STF के कार्यालय संचालित होने की बात कही गई है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में कार्रवाई जारी रहने की जानकारी भी दी गई है।
MP Police Law and Order: होमगार्ड ने बचाई हजारों लोगों की जान
दिए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष होमगार्ड जवानों ने 5,075 नागरिकों की जान बचाने में भूमिका निभाई। कठिन परिस्थितियों में रेस्क्यू करने वाली 10 टीमों के लिए मुख्यमंत्री अदम्य साहसिक कार्य पुरस्कार की घोषणा का भी उल्लेख किया गया है।
आपदा, दुर्घटना और अन्य आपात परिस्थितियों में पुलिस तथा होमगार्ड की त्वरित प्रतिक्रिया को नागरिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
MP Police Law and Order: जेलों की क्षमता और बंदियों के पुनर्वास पर जोर
जेल प्रशासन में भी क्षमता विस्तार और पुनर्वास आधारित व्यवस्था पर काम किए जाने की जानकारी दी गई है। नवंबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच जेलों की अधिकृत क्षमता 29,875 से बढ़कर 30,944 होने तथा बंदियों की संख्या 45,986 से घटकर 42,595 होने का आंकड़ा दिया गया है।
भिंड, छिंदवाड़ा, इंदौर, बुरहानपुर और गैरतगंज में नई जेलों तथा मऊगंज उप-जेल के उन्नयन से लगभग 3,945 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता तैयार होने की जानकारी है। इसके अलावा 119 नई बैरकों के जरिए करीब 2,380 अतिरिक्त क्षमता विकसित किए जाने का उल्लेख है।
MP Police Law and Order: जेलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी सहायता
वर्ष 2024 में जेलों में 5,14,651 बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण का आंकड़ा दिया गया है। 109 जेलों में 5,807 बंदियों को टेलीमेडिसिन के जरिए चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया गया।
इसके अलावा 2,883 बंदियों को कौशल प्रशिक्षण और 5,924 बंदियों को साक्षरता कार्यक्रमों से जोड़े जाने की जानकारी है। वर्ष 2025 में 7 नवंबर तक 1,901 विधिक सहायता शिविरों के माध्यम से 15,176 बंदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया गया है।
बंदीगृह विधेयक, 2024 के पारित होने से जेल प्रशासन में सुधार और पुनर्वास आधारित व्यवस्था को कानूनी आधार मिलने की बात कही गई है।
MP Police Law and Order: शहीद जवानों के परिवारों के लिए सहायता प्रावधान
शहीद जवान के परिवार को मिलने वाली सहायता राशि में 50 प्रतिशत पत्नी और 50 प्रतिशत माता-पिता को देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना है।
MP Police Law and Order: तकनीक और जनविश्वास के साथ आगे बढ़ती पुलिसिंग
मध्यप्रदेश पुलिस की मौजूदा व्यवस्था में तकनीकी संसाधनों, डिजिटल सेवाओं, CCTV निगरानी, साइबर सुरक्षा, आपातकालीन रिस्पॉन्स और वैज्ञानिक जांच को लगातार जोड़ा जा रहा है। SCRB की आधिकारिक जानकारी भी बताती है कि राज्य में e-Rakshak, e-Vivechana, e-FIR और CCTNS जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का इस्तेमाल पुलिसिंग को अधिक तकनीक आधारित बनाने के लिए किया जा रहा है।
कुल मिलाकर पुलिस व्यवस्था का फोकस अपराध होने के बाद कार्रवाई के साथ-साथ अपराध की रोकथाम, त्वरित सहायता, स्थानीय स्तर पर पुलिस-जन संवाद और तकनीकी निगरानी पर है। उद्देश्य यही बताया जा रहा है कि नागरिकों को सुरक्षित माहौल मिले, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई हो और कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।


