BrahmaKumaris : राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीलम दीदी ने स्वदेश न्यूज चैनल हेड आर पी श्रीवास्तव का किया सम्मान, शिवमहापुराण ज्ञान यज्ञ के समापन पर दिया आध्यात्मिक संदेश

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by: digital desk

BrahmaKumaris : भोपाल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण ज्ञान यज्ञ का समापन भव्य और आध्यात्मिक माहौल में हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे कार्यक्रम में भक्ति व सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के समापन पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी नीलम दीदी ने स्वदेश न्यूज के चैनल हेड आर.पी. श्रीवास्तव को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही राज्य सूचना आयुक्त राजेश भट्ट और उनकी धर्मपत्नी सुलेखा भट्ट को भी सम्मानित किया गया। स्वदेश न्यूज के इनपुट एडिटर अजय निगम को भी इस अवसर पर सम्मान मिला।

BrahmaKumaris : “कल्पवृक्ष” के माध्यम से समझाया सृष्टि का रहस्य

कथा के दौरान नीलम दीदी ने “संसार रूपी कल्पवृक्ष” की अवधारणा को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि हम सभी इस वृक्ष के पत्ते हैं और इसके बीज स्वयं शिव परमात्मा हैं। सृष्टि का चक्र सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग के रूप में निरंतर चलता है और हर 5000 वर्षों में इसकी पुनरावृत्ति होती है।

उन्होंने सतयुग में एक धर्म और एक शासक व्यवस्था, त्रेता में श्रीराम-सीता के अवतरण और समय के साथ विभिन्न धर्मों के आगमन का उल्लेख करते हुए वर्तमान समय को परिवर्तन का दौर बताया।

BrahmaKumaris : रुद्राक्षों के आध्यात्मिक महत्व का किया वर्णन

कार्यक्रम के दौरान दीदी ने श्रद्धालुओं को विभिन्न प्रकार के रुद्राक्षों का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि एकमुखी रुद्राक्ष शिव भक्ति का प्रतीक है, जबकि दोमुखी से लेकर दसमुखी रुद्राक्ष तक जीवन के विभिन्न आध्यात्मिक और नैतिक संदेश देते हैं।

उन्होंने बताया कि ये रुद्राक्ष व्यक्ति को आत्मिक शक्ति, संयम और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं। साथ ही यह भी कहा कि शिव परमात्मा को नव-निधियों का दाता माना गया है।

BrahmaKumaris : समाज सुधार का दिया संदेश

नीलम दीदी ने अपने प्रवचन में सामाजिक मूल्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज को संस्कारी बहू चाहिए, तो पहले बेटियों को अच्छे संस्कार देना जरूरी है। कार्यक्रम का समापन महाकाल की भव्य आरती के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण सहभागिता की। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत बना, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश भी दे गया।

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