BY: Yoganand Shrivstva
Bisrakh Ravana Village देशभर में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित बिसरख गांव में इस दिन का माहौल अलग होता है। यहां के लोग रावण को खलनायक के बजाय अपना पूर्वज मानते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बिसरख को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। इसी वजह से गांव में दशहरे पर रावण दहन करने के बजाय विशेष पूजा और हवन किया जाता है।
ऋषि विश्रवा के नाम से जुड़ा है बिसरख का इतिहास
Bisrakh Ravana Village स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिसरख का नाम रावण के पिता ऋषि विश्रवा के नाम पर पड़ा था। कहा जाता है कि प्राचीन समय में इस स्थान को विश्वेशरा कहा जाता था, जो बाद में बदलकर बिसरख हो गया। गांव के प्राचीन शिव मंदिर और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का यहां विशेष महत्व है।
मंदिर के पुजारी रामदास के मुताबिक, इस क्षेत्र को ऋषि पुलस्त्य के आश्रम से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और उनकी बहन शूर्पणखा का बचपन इसी स्थान पर बीता था। हालांकि, इन मान्यताओं की ऐतिहासिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन ग्रामीणों की आस्था में इनका महत्वपूर्ण स्थान है।
दशहरे पर रावण दहन के बजाय होती है पूजा
Bisrakh Ravana Village जब देश के दूसरे हिस्सों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, तब बिसरख में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। यहां दशहरे के अवसर पर रावण की विद्वता और उससे जुड़ी मान्यताओं को याद करते हुए हवन और पूजा की जाती है। ग्रामीणों के लिए रावण केवल रामायण का एक पात्र नहीं, बल्कि उनकी परंपरा और पूर्वजों से जुड़ी पहचान का हिस्सा है।
गांव के प्राचीन शिव मंदिर में मौजूद अष्टकोणीय शिवलिंग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय मान्यता है कि रावण ने इसी शिवलिंग के सामने भगवान शिव की आराधना की थी और अपनी तपस्या से सिद्धियां प्राप्त की थीं। ग्रामीण पीढ़ियों से इन धार्मिक परंपराओं का पालन करते आ रहे हैं।
दुकानों से लेकर गाड़ियों तक दिखती है रावण के नाम की पहचान
Bisrakh Ravana Village बिसरख में रावण से जुड़ी मान्यताएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं। गांव में कई लोग अपनी दुकानों, कारोबार और वाहनों के नाम में भी रावण का उल्लेख करते हैं। यहां रावण डीजे और रावण किराना स्टोर जैसे नाम देखने को मिलते हैं। स्थानीय युवाओं का मानना है कि रावण विद्वान और शक्तिशाली था, इसलिए उसका नाम उनके गांव की विशिष्ट पहचान बन गया है।
गांव में एक पुरानी जर्जर इमारत भी मौजूद है, जिसे कुछ ग्रामीण रावण का घर मानते हैं। आसपास की मिट्टी से पुराने सिक्के और अन्य अवशेष मिलने की बातें भी स्थानीय स्तर पर कही जाती हैं। इस तरह बिसरख की धार्मिक मान्यताएं, प्राचीन मंदिर और रावण से जुड़ी परंपराएं इसे दशहरे के अवसर पर दूसरे स्थानों से अलग पहचान देती हैं।


