बहराइच के गाँव में भेड़िये का आतंक,सुरक्षा में उतरी माएँ, हाथ मे लाठी डण्डे, लेकर पूरी रात दे रही पहरा

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बहराइच के गाँवों में भेड़िये का आतंक,सुरक्षा में उतरी माएँ, हाथ मे लाठी डण्डे, लेकर पूरी रात दे रही पहरा

रिपोर्टर: शबीहुल हसनैन, EDIT BY: MOHIT JAIN

जनपद बहराइच के कैसरगंज इलाके में एक आदमखोर भेड़िये ने हाल के दिनों में मासूम बच्चों पर हमलों का सिलसिला शुरू कर दिया है। इस खूंखार जानवर के हमलों में अब तक चार मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 से अधिक लोग घायल होकर अस्पताल में उपचार करा चुके हैं। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि वन विभाग स्थिति का जायजा ले रहा है और जल्द ही कार्रवाई होगी।

माताओं ने उठाया बच्चों की सुरक्षा का बीड़ा

पहले गांवों में पुरुष ही बच्चों और घरों की सुरक्षा में जुटे थे, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए अब माताएं हाथ में लाठी-डंडा लेकर रातभर पहरा दे रही हैं। मझारा तौकली इलाके के लगभग दर्जनभर गांव बभनन पुरवा, भिरगू पुरवा, बाबा पटाव, देवनाथ पुरवा और गाँधीगंज भेड़िये के आतंक के कारण दिन-रात सतर्क रहने को मजबूर हैं। रामरति नामक ग्रामीण महिला ने कहा, “हम रातभर अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जागते हैं और हर आवाज़ पर ध्यान देते हैं।”

महिलाएं कर रही हैं गाँव में सुरक्षा का काम

रात भर पहरा देने वाली माताओं का कहना है कि वन विभाग इस समस्या को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। आदमखोर न केवल बच्चों बल्कि महिलाओं और पुरुषों पर भी हमला कर रहा है, लेकिन अभी तक उसे पकड़ना संभव नहीं हो पाया है। मीना देवी, एक ग्रामीण महिला ने बताया, “हम केवल तब तक चैन से सो पाएंगे जब यह आदमखोर पिंजरे में कैद होगा। तब तक हम खुद अपने हाथों में सुरक्षा कवच लेकर बच्चों की रक्षा करेंगे।”

रामधीरज, एक ग्रामीण ने कहा कि भेड़िये का डर हर घर में है और माताएं ही अब सुरक्षा की गारंटी बन चुकी हैं। हीरालाल ने जोड़ा कि “हम चाहते हैं कि जल्दी यह खतरा खत्म हो और हमारे बच्चे सुरक्षित महसूस करें।”

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग इस आदमखोर भेड़िये को जल्द ही पकड़ने के लिए ठोस कदम उठाए। माताएं चाहती हैं कि उनके बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिले, ताकि वे रात को निश्चिंत होकर सो सकें।