“क्या भारत अब हिंदू राष्ट्र की ओर आगे बढ़ रहा है?
मध्यप्रदेश के बागेश्वरधाम से निकली एक आवाज़ ने आज देशभर में बहस छेड़ दी है…बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने छतरपुर के गढ़ा में ‘हिंदू ग्राम‘ की नींव रखी है, एक ऐसा गांव, जो पूरी तरह से सनातन संस्कृति को समर्पित होगा। धार्मिक आस्था से प्रेरित इस प्रकल्प को कुछ लोग ‘हिंदू राष्ट्र‘ की दिशा में पहला ठोस कदम मान रहे हैं तो वहीं विपक्ष इसे संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ एक राजनीतिक प्रयोग बता रहा है। अब सवाल ये है कि क्या यह पहल संस्कृति को सजोने की कोशिश है… या समाज को बांटने की? आज की हमारी स्पेशल रिपोर्ट — ‘बागेश्वर से निकली हिंदू राष्ट्र की हुंकार‘ — देखिए, उसके बाद एक संत के संकल्प से कैसे देश की सियासत में हलचल मच गई है। इस मुद्दे पर खास मेहमानों, संतों और मुस्लिम स्कॉलर के साथ चर्चा भी करेंगे..लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं..

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री जी के सामने अक्सर उनके भक्त ऐसे सवाल पूछते हैं..खुद बाबाजी भी कई बार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर चुके हैं. लेकिन मंगलवार को बाबाजी ने छतरपुर के गढ़ा में वो कर दिया. जो वर्षों से राजनीतिक पार्टियां नहीं कर पाईं…बाबाजी ने गढ़ा में बागेश्वरधाम हिंदू ग्राम की आधारशिला रखी. हिंदू ग्राम में 1000 मकानों का निर्माण होगा, यहां एक हजार परिवारों को बसाया जाएगा. कुल मिलाकर बाबाजी ने इस प्रकल्प के माध्यम से हिंदू राष्ट्र की नींव का पत्थर रख दिया है।
इसके साथ ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अब देशभर में हिंदू क्रांति अभियान भी चलाएंगे। शहर-शहर और गांव-गांव में सनातन धर्म और संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा. बाबाजी ने हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में नींव का पत्थर रखा तो राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस ने कहा अगर संविधान धर्म के आधार पर गांव बसाने की अनुमति देता है, तो मुस्लिम, ईसाई और सिख ग्राम बसाने की अनुमति भी दी जाए। कांग्रेस की प्रतिक्रिया आई तो बीजेपी का पलटवार भी आया. बीजेपी की तरफ से कहा गया देश का विभाजन धर्म के आधार पर पहले हो चुका है. अब ये स्वीकार नहीं.
राजनीति भी अपनी जगह है, लेकिन जिस देश की 80 फीसदी आबादी एक ही तरह की जीवन शैली का पालन करती हो..जिस देश की सबसे प्राचीन संस्कृति हो..क्या उस देश के नागरिकों को अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए…इस हिंदू गांव’ को हिंदू राष्ट्र का मील का पत्थर कह सकते हैं…इसे सनातन का नव उदय भी कह सकते हैं..ये प्रकल्प देश के सामाजिक और राजनीतिक भविष्य की नई दिशा भी दिखाता है…लेकिन ये भी देखना जरूरी होगा कि ऐसे प्रकल्प किस तरह आगे बढ़ते हैं, वे सांस्कृतिक जागरूकता बनाते हैं या धार्मिक ध्रुवीकरण का औज़ार, क्योंकि भारत की आत्मा उसकी विविधता में है। यदि ये पहल सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ दूसरों की स्वतंत्रता और अस्तित्व का सम्मान करती है तो ये नया अध्याय सकारात्मक दिशा में ही जाएगा. वरना ये सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने वाला प्रयोग भी साबित हो सकता है। स्वदेश न्यूज के लिए विजय नंदन की रिपोर्ट.
- बागेश्वर से निकली ‘हिंदू राष्ट्र की हुंकार’
- ‘हिंदू राष्ट्र की हुंकार‘, बागेश्वर बना आधार
- हिंदू राष्ट्र का जयघोष, विपक्ष का भारी विरोध
- हिंदू राष्ट्र की ‘बुनियाद‘, बागेश्वर बाबा आधार !
- शास्त्री का संकल्प, हिंदू राष्ट्र की ओर पहला कदम!
- संत का संकल्प, राजनीति में हलचल
- सनातन का जयघोष, विपक्ष का विरोध
- हिंदू ग्राम का ऐलान बना राजनीतिक तूफान
- बाबा का विचार नेताओं में तकरार
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