Mohit Jain
Agra Court Hearing: आगरा की अदालत में ताजमहल को तेजोमहालय बताए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई आज नहीं हो सकी। न्यायालय के रिक्त होने के कारण यह मामला स्थगित कर दिया गया। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी।
Agra Court Hearing: तेजोमहादेव बनाम संस्कृति मंत्रालय का मामला
यह याचिका योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट की ओर से दायर की गई है। केस संख्या 197/2024 में भगवान तेजोमहादेव बनाम भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है। वादी पक्ष के अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सुनवाई टलने की जानकारी दी।

ताजमहल को प्राचीन शिव मंदिर बताने का दावा
वादी पक्ष का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का मूल नाम तेजोमहालय था और यह प्राचीन तेजोलिंग महादेव का मंदिर था। उनका दावा है कि “ताजमहल” नाम उसी का अपभ्रंश रूप है।
Agra Court Hearing: विपक्षी पक्ष जोड़ने पर आदेश बाकी
इस मामले में पहले ही दीवानी प्रक्रिया संहिता के एक प्रावधान के तहत कामरेड भजनलाल को विपक्षी पक्ष बनाने को लेकर बहस हो चुकी है, जिस पर अदालत का आदेश आना अभी शेष है।

इतिहासकारों की राय अलग
मुख्यधारा के इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल एक मकबरा है, जिसे मुगल बादशाह शाहजहाँ ने सत्रहवीं सदी में मुमताज़ महल की स्मृति में बनवाया था। इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
सरकारी पक्ष का स्पष्ट रुख
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और सरकारी पक्ष ने अदालत में कई बार यह स्पष्ट किया है कि ताजमहल को मंदिर या तेजोमहालय बताने का कोई ठोस ऐतिहासिक या पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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Agra Court Hearing: आस्था और इतिहास के बीच विवाद
यह मामला आस्था और इतिहास की अलग-अलग व्याख्याओं से जुड़ा हुआ है। इससे पहले भी ऐसे दावे अदालतों में उठते रहे हैं, लेकिन प्रमाणों के अभाव में इन्हें स्वीकार नहीं किया गया।





