BY: MOHIT JAIN
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रभावशाली संबोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने आतंकवाद, वैश्विक सहयोग, संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत के नेतृत्व में हुए बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम एक बार भी नहीं लिया, उनके शब्दों से स्पष्ट इशारा लगातार उस दिशा में किया गया।
आतंकवाद और पहलगाम हमला

जयशंकर ने कहा कि भारत का एक पड़ोसी लंबे समय से वैश्विक आतंकवाद का केंद्र रहा है। उन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की और दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने जोर देकर कहा:
- आतंकवाद से लड़ना भारत की प्राथमिकता है क्योंकि यह हिंसा, कट्टरता और डर को बढ़ावा देता है।
- आतंकवाद को वित्तीय और संरचनात्मक रूप से कमजोर करना आवश्यक है।
- ऐसे देशों का समर्थन जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, अंततः उन्हें ही नुकसान पहुँचाएगा।
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद एक साझा वैश्विक खतरा है और इसके खिलाफ गहरी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर भारत का दृष्टिकोण
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और संकट पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शांति संकट, विकास संसाधनों की कमी और आतंकवाद के चलते मानवाधिकारों का उल्लंघन होने पर संयुक्त राष्ट्र ठप हो जाता है।
उनका कहना था कि:
- सुधार के विरोध के कारण संगठन की साख कमजोर हुई है।
- परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता बढ़ानी चाहिए।
- अफ्रीका के साथ किए गए ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने की जरूरत है।
ट्रेड और वैश्विक आर्थिक नीतियों पर संकेत
जयशंकर ने अमेरिका या किसी अन्य देश का नाम लिए बिना ट्रेड और टैरिफ़ नीतियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गैर-बाज़ारी तरीकों से नियमों का फायदा उठाने और टैरिफ़ में अनिश्चितताओं के कारण दुनिया कुछ देशों पर निर्भर हो गई है। ऐसे समय में जोखिम कम करने (De-risking) की रणनीति जरूरी है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के दावों का जवाब
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने महासभा में भारत का नाम कई बार लिया और दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत के साथ युद्ध जीत लिया है। उन्होंने शांति और वार्ता की बात कही।
भारत की ओर से स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए कहा:
- शहबाज़ का भाषण आतंकवाद का महिमामंडन था।
- पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकियों के ठिकानों को नष्ट करने का उल्लेख किया।
- भारत-पाकिस्तान मामलों में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं रही; सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं।
जयशंकर का भाषण न केवल आतंकवाद और सुरक्षा पर भारत की सख्त स्थिति को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक सहयोग, संयुक्त राष्ट्र सुधार और आर्थिक नीतियों पर भारत के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करता है। उन्होंने न सिर्फ मजबूती से अपनी बात रखी बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सशक्त छवि पेश की।





